राजनीति की भागदौड़ और संसद की गहमागहमी से ब्रेक लेकर अपोजिशन के लीडर राहुल गांधी आज एक अलग ही अंदाज़ में नज़र आए। मौका था सोनीपत के मदीना गांव में एक किसान की बेटी की शादी का, जहाँ राहुल गांधी ने ‘प्रोटोकॉल’ की दीवारें गिराकर सीधे देसी ठाठ का लुत्फ उठाया।

‘धान’ से ‘कन्यादान’ तक का सफर
ये कहानी सिर्फ एक शादी की नहीं, बल्कि एक पुराने वादे की है। जुलाई 2023 में जब राहुल गांधी ने मदीना गांव के खेतों में संजय मलिक के साथ कीचड़ में उतरकर धान की रोपाई की थी, तब उन्होंने एक वादा किया था “हमेशा साथ रहने का।” आज जब संजय की बेटी की शादी हुई, तो राहुल ने अपना वादा निभाया और आशीर्वाद देने खुद उसके घर पहुँच गए।

पगड़ी, दरी और चूरमा
राहुल गांधी का स्वागत किसी नेता की तरह नहीं, बल्कि घर के बड़े बेटे की तरह हुआ:

सुबह 10:45 बजे जब वे गांव पहुँचे, तो युवाओं ने देसी अंदाज़ में “राहुल भाई, राम-राम” कहकर उनका वेलकम किया। संजय की पत्नी के हाथ का बना ‘देसी घी का चूरमा’ और ताज़ा दूध राहुल के मेन्यू में टॉप पर रहा। उन्होंने बड़े चाव से इसका स्वाद लिया और घर के खाने की जमकर तारीफ की।

सोफे और लग्जरी को छोड़कर राहुल सीधे जमीन पर बिछी दरियों पर ग्रामीणों के बीच बैठ गए। बुजुर्गों ने उन्हें सफेद खादर की शानदार पगड़ी पहनाई।

“यकीन नहीं था कि वो आएंगे”
किसान संजय मलिक और उनका परिवार राहुल को अपने बीच पाकर भावुक हो गया। राहुल ने सिर्फ आशीर्वाद ही नहीं दिया, बल्कि दुल्हन तनु को खास गिफ्ट्स भी भेंट किए। उन्होंने वहां मौजूद महिलाओं के साथ बैठकर हरियाणवी लोक गीतों और खेती-बाड़ी की चुनौतियों पर भी ‘चिल’ अंदाज़ में गपशप की।

भारी सुरक्षा और सीआईडी के साये के बावजूद, राहुल गांधी का ये ‘ह्यूमन टच’ सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। करीब आधे घंटे तक गांव की गलियों में वक्त बिताकर वे वापस दिल्ली रवाना हो गए।