भारतीय राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर एनडीए (NDA) के भीतर बदलते पावर बैलेंस को लेकर आ रही है। केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के ‘किंगमेकर’ कहे जाने वाले जदयू (JDU) प्रमुख नीतीश कुमार और टीडीपी (TDP) चीफ चंद्रबाबू नायडू की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि विपक्ष में मची आपसी कलह के बीच नीतीश और नायडू की ‘बार्गेनिंग पावर’ (सौदेबाजी की ताकत) अब पहले जैसी नहीं रही।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी (TMC) और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में जारी अंदरूनी खींचतान का सीधा फायदा बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए को मिलने जा रहा है, जिससे गठबंधन का कुनबा और मजबूत हो रहा है।
इस नए राजनीतिक पुनर्संयोजन (Political Realignment) के बाद जो समीकरण बन रहे हैं, उसने सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है:
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में होने वाले मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार में इस नई रणनीति की साफ झलक देखने को मिल सकती है।
किंगमेकर्स बैकफुट पर: कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष से पाला बदलकर आने वाले बागी नेताओं को पीएम मोदी सीधे अपनी नई टीम यानी केंद्रीय कैबिनेट में जगह दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू का राजनीतिक दबाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
इस पूरे परिदृश्य ने भारतीय लोकतंत्र की एक चिंताजनक प्रवृत्ति को भी उजागर किया है:
विपक्ष के इस बिखराव का फायदा एनडीए को सिर्फ लोकसभा में ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी मिलेगा, जहां कई महत्वपूर्ण बिलों को पास कराने के लिए सरकार को कड़ा संघर्ष करना पड़ता था। कुल मिलाकर, एनडीए का बढ़ता कुनबा जहां पीएम मोदी को असीमित ताकत दे रहा है, वहीं नीतीश और नायडू जैसे कद्दावर सहयोगियों को टेंशन में डाल रहा है।
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