नई दिल्ली। नासा के Swift Observatory Telescope को बचाने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। टेलीस्कोप को सुरक्षित और ऊंची कक्षा में पहुंचाने के लिए चलाया गया मिशन सफल नहीं हो सका। इसके बाद नासा ने साफ कर दिया है कि अब इसे तय योजना के मुताबिक ऊंची कक्षा में ले जाने की कोशिश आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
नासा का यह टेलीस्कोप इस साल के अंत तक धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर नीचे आ सकता है। हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक वायुमंडल में प्रवेश करते समय तेज घर्षण के कारण इसका ज्यादातर हिस्सा जल जाएगा और केवल कुछ मलबा ही पृथ्वी तक पहुंचने की संभावना है।
Neil Gehrels Swift Observatory को साल 2004 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। इसका मुख्य काम ब्रह्मांड में होने वाले बेहद शक्तिशाली Gamma-Ray Bursts (GRBs) और तारों से जुड़ी बड़ी खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करना था।
पिछले दो दशकों से ज्यादा समय में Swift Telescope ने वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की कई रहस्यमयी घटनाओं को समझने में मदद की है। इस साल की शुरुआत में इसके वैज्ञानिक उपकरण बंद कर दिए गए थे, ताकि इसके पृथ्वी की ओर गिरने की रफ्तार को कुछ हद तक कम किया जा सके।
नासा ने टेलीस्कोप को बचाने के लिए एरिजोना की एयरोस्पेस कंपनी Catalyst Space Technologies के साथ मिलकर एक खास मिशन शुरू किया था। करीब 30 मिलियन डॉलर के इस मिशन का मकसद Swift Telescope को ऊंची और ज्यादा स्थिर कक्षा में पहुंचाना था।
इसके लिए करीब एक महीने पहले ‘Link’ स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किया गया था। लेकिन स्पेसक्राफ्ट को नियंत्रित करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण मिशन को आगे बढ़ाना संभव नहीं हो सका।
कंपनी ने अब टेलीस्कोप को ऊंची कक्षा में ले जाने की योजना रोक दी है।
नासा के मुताबिक, Swift Telescope की कक्षा लगातार नीचे आ रही थी और सूर्य की बढ़ी हुई गतिविधि के कारण यह गिरावट अनुमान से ज्यादा तेजी से हुई।
नासा के खगोल भौतिकी विभाग के निदेशक शॉन डोमागल-गोल्डमैन ने कहा कि यह शुरू से ही एक हाई-रिस्क और हाई-रिवॉर्ड मिशन था। यह अपनी तरह का पहला प्रयास था और इसे सूर्य की गतिविधियों से पैदा हुई बेहद कम समय की चुनौती के बीच तैयार किया गया था।
Swift Telescope को 2004 में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था। हालिया जानकारी के मुताबिक, पिछले हफ्ते तक यह पृथ्वी से करीब 347 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा था।
अब रेस्क्यू मिशन के असफल होने के बाद इसकी कक्षा लगातार नीचे आने की संभावना है। हालांकि, इसके पृथ्वी पर गिरने से किसी बड़े नुकसान की आशंका फिलहाल नहीं जताई गई है, क्योंकि वायुमंडल में प्रवेश के दौरान इसका अधिकांश हिस्सा जलने की उम्मीद है।
Swift Telescope ने करीब 20 वर्षों तक गामा-रे बर्स्ट जैसी ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली घटनाओं का अध्ययन किया। इसके जरिए वैज्ञानिकों को ब्लैक होल, तारों के विस्फोट और दूसरी बेहद ऊर्जावान खगोलीय घटनाओं को समझने में अहम डेटा मिला।
अब इसके मिशन के अंतिम चरण के साथ अंतरिक्ष विज्ञान के एक महत्वपूर्ण अध्याय का भी अंत होने जा रहा है।
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