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भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर ? नागा आंदोलन की अमेरिकी लॉबिंग ने बढ़ाई कूटनीतिक हलचल

नई दिल्ली/वाशिंगटन, 16 जनवरी 2026: नागा आंदोलन में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वजह है अमेरिका में एक पुराने नाम की वापसी। ग्रेस कॉलिन्स नाम की अमेरिकी लॉबिस्ट 14 साल बाद फिर से सक्रिय हो गई हैं और इस बार वह “वन नागा वॉयस” नाम के संगठन की ओर से नागा लोगों के लिए स्व-निर्णय यानी सेल्फ-डिटर्मिनेशन की मांग को लेकर लॉबिंग कर रही हैं। नवंबर 2025 में उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग में विदेशी एजेंट के तौर पर पंजीकरण कराया और इसके बाद से अमेरिकी सत्ता गलियारों में नागा मुद्दे को दोबारा उठाने की कोशिश शुरू कर दी है।

14 साल बाद पुरानी लॉबिस्ट की वापसी

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रेस कॉलिन्स इससे पहले 2003 से 2011 के बीच “पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ नागालिम” के लिए काम कर चुकी हैं। उस दौर में वह खुद को नागालिम की “ऑनरेरी एम्बेसडर” बताती थीं और अमेरिका में अलग नागा राष्ट्र की मांग को लेकर लगातार लॉबिंग करती रहीं। तब उनका सीधा जुड़ाव NSCN-IM से माना जाता था, जो नागालैंड, मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश के नागा-बहुल इलाकों को मिलाकर “नागालिम” नाम के अलग देश की मांग करता रहा है। इस बार भी कॉलिन्स अमेरिकी कांग्रेस और ट्रंप प्रशासन से नागा आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रही हैं।

भारत का आंतरिक मामला या अंतरराष्ट्रीय मुद्दा?

नागा आंदोलन भारत के सबसे पुराने अलगाववादी आंदोलनों में से एक है, जिसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। NSCN-IM जैसे संगठन 1997 से भारत सरकार के साथ शांति वार्ता में शामिल हैं, लेकिन अलग झंडा और अलग संविधान की मांग अब भी बातचीत में अड़चन बनी हुई है। वहीं NSCN-K और अन्य गुटों की अपनी अलग सोच और मांगें हैं, जिससे हालात और जटिल हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी लॉबिंग से नागा मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिर उभर सकता है, खासकर मानवाधिकार और स्व-निर्णय के नाम पर। हालांकि भारत सरकार इसे साफ तौर पर देश का आंतरिक मामला मानती है और अलगाववादी गतिविधियों पर सख्त नजर रखे हुए है। ऐसे में “वन नागा वॉयस” जैसे संगठनों की सक्रियता आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर डाल सकती है।

news desk

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