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सेंसेक्स-निफ्टी ने सुबह-सुबह दिया झटका, बाजार खुलते ही बड़ी गिरावट; 24,400 के नीचे फिसला निफ्टी

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 14 अगस्त को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में 251 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 24,400 के स्तर से नीचे आ गया।

निफ्टी 50 करीब 50 अंक यानी 0.20 प्रतिशत गिरकर 24,346 के स्तर पर खुला। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 251 अंक यानी 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,828.65 पर खुला।

एशियाई बाजारों में तेजी

भारतीय बाजार में कमजोरी के बीच ज्यादातर प्रमुख एशियाई बाजारों में तेजी का रुख रहा। जापान का निक्केई 225 0.75 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ खुला, जबकि टॉपिक्स में 0.23 प्रतिशत की तेजी रही।

दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में 2.54 प्रतिशत ऊपर रहा। वहीं, स्मॉल-कैप कोस्डैक 1.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ खुला। दूसरी ओर, हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स का वायदा 25,214 के स्तर पर था, जो इसके पिछले बंद भाव 25,396.51 से नीचे रहा।

अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड स्तर पर बंद

अमेरिकी बाजार में भी पिछले कारोबारी सत्र के दौरान प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। एसएंडपी 500 में 0.65 प्रतिशत की तेजी रही और यह पहली बार 7,800 के पार पहुंच गया। सूचकांक 7,798.99 के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ।

नैस्डैक कंपोजिट 0.81 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,803.03 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.13 प्रतिशत यानी 69.72 अंकों की मामूली बढ़त रही और यह 53,839.99 पर बंद हुआ।

कच्चे तेल की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव

कच्चे तेल के बाजार में भी शुक्रवार को मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा 0.04 प्रतिशत गिरकर 81.22 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

वहीं, ब्रेंट क्रूड वायदा 0.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ 87.10 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। यह कीमत मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे है। कॉमेक्स पर भी कच्चे तेल की कीमत 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81.22 डॉलर प्रति बैरल रही।

बॉन्ड मार्केट क्या होता है?

जब किसी कंपनी को नया संयंत्र लगाने या अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है, तो उसके पास धन जुटाने के कई विकल्प होते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि कंपनियां ऐसी जरूरतों के लिए बैंकों से कर्ज लेती हैं। हालांकि, कई बड़ी कंपनियां बैंक से कर्ज लेने के बजाय बॉन्ड जारी कर निवेशकों से सीधे पैसा जुटाती हैं।

vineet verma

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