हम सब ये सोचकर खुश हो जाते हैं कि देश में अनाज की पैदावार रिकॉर्ड तोड़ रही है, खेत लहलहा रहे हैं और गोदाम भरे पड़े हैं। लेकिन इस खुशखबरी के पीछे एक छोटी-सी, मगर अहम हेल्थ वाली बात छिपी है, जो सीधे हमारी थाली और हमारे शरीर से जुड़ी है। सच्चाई ये है कि आज जो अनाज हम खा रहे हैं, वो पेट तो भर रहा है, लेकिन पहले जितनी ताकत नहीं दे पा रहा।
मिट्टी थकी हुई है, असर सीधे सेहत पर
लंबे वक्त से यूरिया और केमिकल खादों के ज्यादा इस्तेमाल ने मिट्टी को अंदर से कमजोर कर दिया है। जिस मिट्टी में कभी जान होती थी, वो अब धीरे-धीरे “थकी हुई” लगने लगी है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मिट्टी में मौजूद ऑर्गेनिक कार्बन काफी घट गया है और साथ ही जिंक, आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व भी कम हो रहे हैं। इसका सीधा मतलब है – फसल में पोषण कम और हमारी थाली में भी वही कमी।

पेट भरा, लेकिन शरीर अधूरा
यही वजह है कि आज कई लोग भरपेट खाने के बावजूद थकान, कमजोरी या चक्कर जैसी शिकायत करते हैं। बच्चों में ध्यान की कमी, ग्रोथ स्लो होना और महिलाओं में खून की कमी जैसी दिक्कतें भी इसी चेन का हिस्सा हैं। अगर मिट्टी में जिंक और आयरन कम होंगे, तो अनाज में भी वो नहीं आएंगे और रोज-रोज वही खाना हमारी बॉडी को पूरा न्यूट्रिशन नहीं दे पाएगा। इसे ही हेल्थ एक्सपर्ट्स “छिपी हुई भूख” कहते हैं।
ज्यादा अनाज, कम पोषण
देश में अनाज की मात्रा बढ़ना बुरी बात नहीं है, लेकिन अगर उसकी कीमत सेहत से चुकानी पड़े तो सोचने की जरूरत है। मिट्टी को सिर्फ पैदावार की मशीन नहीं, बल्कि एक जिंदा सिस्टम समझने का वक्त आ गया है। क्योंकि सेहत सिर्फ जिम, योग या सप्लीमेंट से नहीं बनती—वो खेत से शुरू होती है। अगर मिट्टी मजबूत होगी, तभी हमारी थाली और हमारा शरीर दोनों मजबूत रहेंगे।