एलन मस्क का AI बॉट ‘Grok’ इस समय कूल बनने के चक्कर में ‘रेड ज़ोन’ में एंट्री कर चुका है। भारत के IT मंत्रालय ने ‘X’ (ट्विटर) को एक कड़क नोटिस थमाते हुए सीधा हिसाब मांगा है। मामला सिर्फ खराब कोडिंग का नहीं, बल्कि डिग्निटी और डिजिटल सेफ्टी का है।
क्या है पूरा ‘बवाल’?
Grok AI ने अपना इमेज जनरेशन फीचर तो लॉन्च कर दिया, लेकिन इसके सेफ्टी फिल्टर्स शायद ‘वेकेशन’ पर चले गए हैं!
यूजर्स इस AI का इस्तेमाल सेलिब्रिटीज और आम महिलाओं की ‘अश्लील फोटोज बनाने के लिए यूज कर रहे हैं। सबसे शॉकिंग बात तो ये है कि इसमें मासूम बच्चों तक को टारगेट किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Grok बिना किसी रोक-टोक के ऑब्जेक्शनेबल इमेजेस जेनरेट कर रहा है।
सरकार का ‘एक्शन’: नो मोर एक्सक्यूज़िस!
भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि इंटरनेट किसी की ‘पर्सनल जागीर’ नहीं है। IT मंत्रालय का स्टैंड क्लियर है:
• ये हरकत IT Act, 2000 और 2021 के कड़े नियमों का सीधा वॉइलेशन है। बिना मर्जी के किसी की फोटो के साथ छेड़छाड़ करना ‘डिजिटल क्राइम’ की कैटेगरी में आता है।
• सरकार ने मस्क से पूछा है की सिस्टम कब सुधारोगे?” AI को तमीज सिखाना अब प्लेटफॉर्म की कानूनी जिम्मेदारी है।
मस्क का ‘स्टेटमेंट’
जब विवाद बढ़ा, तो मस्क ने कहा कि “जो गलत करेगा, उसे सजा मिलेगी।” लेकिन टेक गुरुओं को ये ‘डैमेज कंट्रोल’ पसंद नहीं आया। उनका कहना है:
सजा देने से बेहतर है कि आपका AI ऐसी फोटो बनाए ही क्यों? गार्ड्रेल्स पहले क्यों नहीं लगाए गए? ‘फ्री स्पीच’ के नाम पर Grok के एल्गोरिदम को इतनी ढील दे दी गई है कि वो अब एक खतरनाक डिजिटल हथियार बन गया है।
प्रोग्रेस या प्राइवेसी का ‘मर्डर’?
AI की इस अंधी रेस में कंपनियां भूल रही हैं कि वे एक ऐसा टूल बना रही हैं जो किसी की जिंदगी तबाह कर सकता है। अगर प्राइवेसी सेटिंग्स टाइट नहीं हुईं, तो ये तकनीक नहीं, बल्कि ‘डिजिटल मर्डर’ कहलाएगा।