मुंबई में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स
मुंबई : बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद मुंबई की राजनीति में एक बार फिर वही पुरानी फिल्म चल पड़ी है, जिसे लोग अब ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ के नाम से पहचानने लगे हैं। महायुति गठबंधन को बहुमत मिलने के बावजूद मेयर की कुर्सी को लेकर बेचैनी साफ दिख रही है। यही वजह है कि शिवसेना (शिंदे गुट) के 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को सीधे बांद्रा के ताज लैंड्स एंड होटल में ठहरा दिया गया है। पार्टी इसे “ट्रेनिंग और ओरिएंटेशन” बता रही है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे किसी से छिपी बात नहीं माना जा रहा।
बीएमसी के 227 सदस्यों के लिए 15 जनवरी को वोटिंग हुई थी और 16 जनवरी को नतीजे आए। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि शिंदे गुट को 29 सीटें मिलीं। दोनों मिलकर 118 के आंकड़े पर पहुंच गए, जो बहुमत से ज्यादा है। इसके बावजूद होटल की राजनीति ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उधर, उद्धव ठाकरे ने मौके पर चोट करते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे भाजपा से डरे हुए हैं और इसलिए अपने पार्षदों को पांच सितारा होटल में “सुरक्षित” रखा गया है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि जो एक बार टूट सकता है, वो दोबारा भी टूट सकता है।
दरअसल, ऐसा पहली बार नहीं है। 2019 में कर्नाटक में भी भाजपा ने कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिराने से पहले विधायकों को रिसॉर्ट में रखा था। महाराष्ट्र में ही 2019 में अजित पवार प्रकरण के दौरान भी विधायकों की गिनती और होटल शिफ्टिंग खूब चर्चा में रही। मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिरने से पहले भी यही रणनीति देखने को मिली थी। यानी सत्ता की बाजी पलटने के लिए “होटल मॉडल” भाजपा के लिए नया नहीं है।
संजय राउत ने भी तंज कसते हुए कहा कि मुंबई में भाजपा का मेयर कोई नहीं चाहता, यहां तक कि शिंदे भी नहीं। फिलहाल मेयर चुनाव की तारीख तय नहीं है, लेकिन एक बात साफ है- मुंबई की राजनीति में सत्ता की जंग अब सड़क से ज्यादा होटल के कमरों में लड़ी जा रही है।
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