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MP में किसान मुद्दों पर सड़कों पर उतरी कांग्रेस, किसानों के समर्थन में हाईवे हुआ जाम

भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश की सियासत में आज ‘किसान’ सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन गए हैं। किसानों की समस्याओं और चुनावी वादों को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश व्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

गुरुवार, 7 मई 2026 को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे (NH-3) सहित प्रदेश के कई प्रमुख मार्गों को पूरी तरह जाम कर दिया। इस चक्का जाम के कारण हाईवे पर कई किलोमीटर लंबी ट्रकों और वाहनों की कतारें लग गईं, जिससे जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है।

2700 का वादा और 2625 का सच: कांग्रेस का हमला

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस आंदोलन का नेतृत्व करते हुए मोहन यादव सरकार पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया। पटवारी ने कहा “भाजपा ने चुनाव के समय किसानों से गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया था, लेकिन आज अन्नदाता को केवल 2625 रुपये ही मिल रहे हैं। यह किसानों के साथ सीधा धोखा और शोषण है।”

कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी खरीद की रफ्तार धीमी होने के कारण किसान अपनी मेहनत की फसल को खुले बाजार में औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं।

हाईवे पर ‘ट्रैक्टर मार्च’: इंदौर और मुरैना में कड़ा संघर्ष

आंदोलन की धमक इंदौर से लेकर ग्वालियर-चंबल तक सुनाई दी…

  • इंदौर: मेडिकैप्स कॉलेज चौराहे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाईवे के बीचों-बीच ट्रैक्टर खड़े कर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन इतना प्रभावी था कि आगरा और मुंबई के बीच का सीधा संपर्क घंटों बाधित रहा।
  • मुरैना: नेशनल हाईवे-44 पर सात अलग-अलग स्थानों पर घेराबंदी की गई। ग्वालियर-मुरैना सीमा (निरावली तिराहे) पर कांग्रेस सचिव जसबीर गुज्जर के नेतृत्व में भारी संख्या में कार्यकर्ता जुटे।
  • प्रशासनिक अलर्ट: चक्का जाम की स्थिति को देखते हुए पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई।

खाद की किल्लत और धान खरीद पर भी घेरा

सिर्फ गेहूं ही नहीं, कांग्रेस ने खेती के उपकरणों पर टैक्स, खाद की निरंतर कमी और धान की खरीद में हो रही देरी को लेकर भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। जीतू पटवारी ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन ‘सड़कों से जेलों’ तक पहुंचेगा।

क्यों हो रहा है यह आंदोलन?

  1. MSP विवाद: ₹2700 के वादे के खिलाफ ₹2625 का भुगतान।
  2. कम खरीद: जरूरत के मुकाबले सरकारी सेंटर्स पर कम गेहूं की तुलाई।
  3. संसाधनों का अभाव: खेती के उपकरणों और खाद की कीमतों में बढ़ोतरी।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस का यह ‘एग्रेसिव’ मोड बताता है कि आने वाले दिनों में कृषि और किसान ही प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, चक्का जाम के चलते पुलिस प्रशासन वैकल्पिक रास्तों से ट्रैफिक निकालने की कोशिश में जुटा है।

news desk

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