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Monsoon Session Day 1: संसद मार्च से ठीक पहले हड़कंप! CJP का बड़ा दावा- ‘बैकडोर से बातचीत में जुटी सरकार’, जंतर-मंतर पर GenZ का बड़ा जमावड़ा

संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा सियासी और सामाजिक संग्राम छिड़ गया है। NEET पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का ‘संसद मार्च’ शुरू हो चुका है। पुलिस की कड़ी पाबंदियों के बीच CJP ने दावा किया है कि सरकार ने उनसे संपर्क साधने की कोशिश की है।

बैकडोर बातचीत का दावा: क्या झुक रही है सरकार?

संसद मार्च शुरू होने से ठीक पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बड़ा बयान दिया:

“प्रशासन और सरकार बातचीत का रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि वे बहुत देर से आए हैं, लेकिन हम खुले दिल से बात करने को तैयार हैं। गेंद अब सरकार के पाले में है।”

वही दूसरी ओर, आंदोलन में शामिल जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने साफ किया कि अगर जनप्रतिनिधि संसद के भीतर शिक्षा और परीक्षाओं की जवाबदेही तय करने का ठोस भरोसा देते हैं, तो भूख हड़ताल खत्म करने पर विचार किया जा सकता है।

जंतर-मंतर पर उतरी ‘GenZ क्रांति’, गांधी के परपोते का समर्थन

जंतर-मंतर पर देशभर से आए हजारों छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और अभिभावक डटे हुए हैं। महात्मा गांधी के परपोते ने इस आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा— “जंतर-मंतर पर एक नई क्रांति जन्म ले चुकी है। अब यह केवल वांगचुक या CJP तक सीमित नहीं है, इसे भारत की GenZ आगे बढ़ा रही है।”

नई दिल्ली में धारा 163 लागू, छावनी में तब्दील हुआ इलाका

संसद के घेराव के ऐलान को देखते हुए दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं:

  • थ्री-टियर सुरक्षा घेरा: जंतर-मंतर, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट पर पैरामिलिट्री फोर्स और दिल्ली पुलिस के जवानों का त्रिस्तरीय सुरक्षा ग्रिड तैनात किया गया है।
  • कोई अनुमति नहीं: नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है।
  • सख्त कानूनी चेतावनी: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पुरानी धारा 144) लागू कर दी गई है। आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर BNS की धारा 223 के तहत सीधी जेल और सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।


क्यों सुलग रहा है छात्रों का गुस्सा? (3 मुख्य मांगें)

  1. NEET व भर्ती धांधली की जांच: सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली और पेपर लीक की निष्पक्ष जांच व जवाबदेही तय हो।
  2. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: भर्ती और परीक्षा प्रणाली में विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
  3. बेरोजगारी और भर्ती में देरी पर ब्रेक: सरकारी भर्ती परीक्षाओं के अटके परिणामों को तुरंत जारी किया जाए और युवाओं को रोजगार की गारंटी मिले।

news desk

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