नई दिल्ली का भारत मंडपम आज टेक्नोलॉजी और पॉलिसी की दुनिया का सबसे बड़ा मंच बन गया, जब Narendra Modi ने भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भविष्य की दिशा तय करने वाला विजन पेश किया। माहौल बिल्कुल वैश्विक था—20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 से अधिक एआई लीडर्स एक ही छत के नीचे मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि भारत एआई क्रांति का सिर्फ हिस्सा नहीं है, बल्कि इसे दिशा देने की क्षमता रखता है। उनके मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव इतिहास का एक बड़ा मोड़ है—जो या तो समाधान बनेगा या फिर बिना दिशा के समस्या भी बन सकता है। उन्होंने युवाओं की नौकरी को लेकर उठ रही चिंताओं पर भी बात की और कहा, “डर का सबसे अच्छा इलाज तैयारी है।” लक्ष्य साफ है—2047 तक भारत को दुनिया की टॉप तीन एआई शक्तियों में शामिल करना।
‘मानव विजन’ क्या है?
मोदी ने अपने भाषण में ‘MANAV Vision’ पेश किया—एक ऐसा फ्रेमवर्क जो एआई को पूरी तरह मानव-केंद्रित बनाने पर जोर देता है।
MANAV का मतलब है:
- M – Moral and Ethical Systems: एआई नैतिक नियमों पर आधारित हो
- A – Accountable Governance: पारदर्शी और जवाबदेह निगरानी
- N – National Sovereignty: डेटा पर देश का अधिकार
- A – Accessible and Inclusive: एआई सबके लिए हो, कुछ के लिए नहीं
- V – Valid and Legitimate: कानूनी और सत्यापित उपयोग
प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई को डेटा पॉइंट्स का खेल नहीं बनना चाहिए, बल्कि इंसानों को सशक्त करने का जरिया बनना चाहिए। उन्होंने परमाणु ऊर्जा का उदाहरण देते हुए चेताया कि हर ताकत का सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू होता है—इसलिए स्पष्ट नियम और जिम्मेदार शासन जरूरी है।
टेक्नोलॉजी में समावेशन की झलक
समारोह का एक खास पल तब आया जब मोदी के भाषण का रीयल-टाइम एआई आधारित साइन लैंग्वेज अनुवाद बड़ी स्क्रीन पर दिखाया गया। यह “एआई फॉर ऑल” की थीम को जमीन पर उतारने जैसा था।
ग्लोबल साउथ और निवेश पर फोकस
प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ के लिए एआई को लोकतांत्रिक बनाने की बात कही। उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी कुछ देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। भारत 200 बिलियन डॉलर से ज्यादा एआई निवेश आकर्षित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron, गूगल सीईओ Sundar Pichai और ओपनएआई प्रमुख Sam Altman जैसे दिग्गज भी शामिल हैं।
कुल मिलाकर, यह समिट सिर्फ टेक इवेंट नहीं, बल्कि भारत की उस सोच का प्रदर्शन है जिसमें एआई को “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के मंत्र के साथ जोड़ा जा रहा है—यानी टेक्नोलॉजी सबके लिए, सबके विकास के लिए।