शेक्सपियर अगर साहित्य के बजाए भारत की सियासत से जुड़े होते तो कभी नहीं कहते कि ‘नाम में क्या रखा है’। क्योंकि भारत की राजनीति में नाम के अंदर बहुत कुछ रखा है। इसीलिए समय समय पर सड़क से लेकर योजनाओं तक के नाम बदले जाते हैं। ताजा नामकरण मनरेगा का हुआ है। महात्मा गांधी के नाम पर शुरू की गई ग्रामीण भारत को रोजगार की गारंटी देने वाली योजना अब “जी राम जी” के नाम से जानी जाएगी।
लोकसभा में मनरेगा का नाम बदलने वाले बिल पेश करने के बाद केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर निशाना साधा ‘यह पूरा बिल महात्मा गांधी के अनुरूप है और राम राज्य की स्थापना के लिए लाया जा रहा है। मुझे समझ नहीं आता कि राम का नाम जुड़ते ही इन लोगों को बिल से क्या आपत्ति हो गई’।
महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध में संसद में जमकर हंगामा हुआ। प्रियंका गांधी ने इसे नाम बदलने की सनक बताया। वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि ‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस देश की आत्मा को जगाने का काम किया, इस देश को आजादी दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। आज भाजपा के पास कुछ नया करने को नहीं है इसलिए पुराने नामों को बदल रही है’।
वहीं कांग्रेस आरोप लगा रही है कि उसकी सरकार में शुरू हुई लगभग 30 योजनाओं के नाम मौजूदा सरकार में बदले गए। दरअसल मौजूदा सरकार मनरेगा को लेकर शुरू से कांग्रेस पर तंज कसती रही है, इसे असफलता का स्मारक तक करार चुकी है। हालांकि कोविड काल में मनरेगा ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था संभालने में बड़ी भूमिका निभा चुका है।