आज दिल्ली के जवाहर भवन में कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ मोर्चा’ के तहत राष्ट्रीय स्तर का बड़ा और बेहद प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित किया। मंच का दृश्य अपने आप में संदेश दे रहा था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मजदूरों की तरह गमछा बांधे और हाथ में फावड़ा लिए नजर आए। यह प्रतीकात्मक अंदाज मनरेगा मजदूरों की मेहनत, उनके संघर्ष और उनके अधिकारों की लड़ाई को दिखाने के लिए अपनाया गया।
मजदूरों की मिट्टी और मंच से सरकार पर हमला
देशभर से हजारों मनरेगा मजदूर इस कार्यक्रम में शामिल हुए। खास बात यह रही कि हर मजदूर अपने काम की साइट से मिट्टी की एक मुट्ठी लेकर आया, जो उनके पसीने और जमीन से जुड़ी मेहनत का प्रतीक बनी। मंच से खड़गे और राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और VB-G RAM G Act को लेकर सवाल खड़े किए, जिसे कांग्रेस मनरेगा को कमजोर करने वाला कानून बता रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने मनरेगा को उसके मूल स्वरूप से दूर कर दिया है। पहले यह काम का अधिकार था, लेकिन अब इसे ‘रेवड़ी’ की तरह बना दिया गया है, जिसे सरकार अपनी मर्जी से दे या रोक दे। पार्टी का कहना है कि नया कानून पंचायतों की ताकत छीन रहा है, मजदूरी को अनिश्चित बना रहा है और राज्यों पर 40 फीसदी फंडिंग का बोझ डाल रहा है। महात्मा गांधी का नाम हटाने को भी कांग्रेस ने योजना और गांधी विचारधारा का अपमान बताया।
तीन मांगें और देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ तौर पर तीन मांगें रखीं—VB-G RAM G Act को वापस लिया जाए, मनरेगा को फिर से अधिकार-आधारित कानून बनाया जाए और पंचायतों को उनके पूरे अधिकार लौटाए जाएं। राहुल गांधी ने कहा कि यह फैसला गरीबों को भूखा रखने जैसा है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा नुकसान होगा।
यह कार्यक्रम कांग्रेस के देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का हिस्सा है, जो जनवरी से चल रहा है। चौपाल, रैलियों और जनसंपर्क के जरिए कांग्रेस इस मुद्दे को गांव-गांव तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है।