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विज्ञान की दुनिया से एक क्रांतिकारी खुलासा सामने आया है, जिसने मस्तिष्क के रहस्यों से पर्दा उठा दिया है। साल 2026 का मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों—कार्ल डीसेरोथ, पीटर हैंगमैन और जॉर्ज नागेल —को संयुक्त रूप से दिया गया है। इन्होंने ‘ऑप्टोजेनेटिक्स‘ पर ऐसी खोज की है, जिससे यह पता चलता है कि जीवित मस्तिष्क के अंदर तंत्रिका कोशिकाएं हमारी यादों और भावनाओं को कैसे आकार देती हैं। स्टॉकहोम के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में इस घोषणा के साथ नोबेल सप्ताह शुरू हुआ है। विजेताओं में 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (करीब 11.96 लाख डॉलर) की राशि बराबर बांटी जाएगी।
2026 का नोबेल पुरस्कार मेडिसिन के क्षेत्र में ‘ऑप्टोजेनेटिक्स’ की खोज के लिए दिया गया है। यह एक ऐसी तकनीक है, जिसने वैज्ञानिकों को जीवित मस्तिष्क के भीतर न्यूरॉन्स की गतिविधियों का अध्ययन करने का नया तरीका दिया। इस खोज ने न्यूरोसाइंस में शोध की संभावनाओं को काफी विस्तार दिया है।
पीटर हैंगमैन और जॉर्ज नागेल ने एक-कोशिका वाले शैवाल में ‘चैनलरोडोप्सिन’ नाम के प्रोटीन की खोज की थी। बाद में कार्ल डीसेरोथ ने इसी प्रोटीन का इस्तेमाल तंत्रिका कोशिकाओं को प्रकाश के जरिए नियंत्रित करने के लिए किया। इस तकनीक ने न्यूरॉन्स को ‘लाइट-कंट्रोल्ड स्विच’ की तरह समझने और अध्ययन करने का रास्ता खोला।
साल 1971 में जन्मे कार्ल डीसेरोथ ने अपनी उच्च शिक्षा स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पूरी की। उन्होंने 1998 में पीएचडी और 2000 में एमडी की डिग्री हासिल की। विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता ने आगे चलकर न्यूरोसाइंस में महत्वपूर्ण शोध का रास्ता तैयार किया। ऑप्टोजेनेटिक्स के विकास में उनके योगदान ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
वर्तमान में कार्ल डीसेरोथ हॉवर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं, जहां वह ‘डी.एच. चेन प्रोफेसर’ के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा, वह स्टैनफोर्ड में बायोइंजीनियरिंग, मनोरोग और व्यवहार विज्ञान के प्रोफेसर भी हैं। उनका शोध न्यूरॉन्स और मस्तिष्क की जटिल गतिविधियों को समझने पर केंद्रित रहा है।
पीटर हैंगमैन ने 1984 में जर्मनी के मैक्स-प्लैंक-इंस्टीट्यूट फॉर बायोकेमिस्ट्री से पीएचडी पूरी की। इसी संस्थान में रहते हुए उन्होंने अपनी ऐतिहासिक खोज पर काम किया। वर्तमान में वह जर्मनी की हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन में ‘हर्टी सीनियर प्रोफेसर ऑफ न्यूरोसाइंस’ के पद पर कार्यरत हैं। ऑप्टोजेनेटिक्स से जुड़ी उनकी रिसर्च ने न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलीं।
1953 में जन्मे जॉर्ज नागेल ने 1988 में जर्मनी की फ्रैंकफर्ट यूनिवर्सिटी से पीएचडी हासिल की। उन्होंने अपनी पुरस्कृत खोज पर मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर बायोफिजिक्स में काम किया। वर्तमान में वह जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ वुर्जबर्ग के मॉलिक्यूलर प्लांट फिजियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर हैं।
कार्ल डीसेरोथ, पीटर हैंगमैन और जॉर्ज नागेल की खोज ने मस्तिष्क और न्यूरॉन्स को समझने की वैज्ञानिक दुनिया में एक नई दिशा दी है। ऑप्टोजेनेटिक्स ने प्रकाश की मदद से तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधियों को नियंत्रित और अध्ययन करना संभव बनाया, जिससे यादों, भावनाओं और व्यवहार जैसे जटिल पहलुओं पर रिसर्च के नए रास्ते खुले हैं। इन तीनों वैज्ञानिकों का काम न सिर्फ न्यूरोसाइंस के लिए मील का पत्थर है, बल्कि भविष्य में मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों को समझने और उनके संभावित इलाज की दिशा में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
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