नई दिल्ली: मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में कथित बदलाव को लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के बीच चल रहे मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की 26 सितंबर 2026 की प्रेस नोट साझा करते हुए फॉर्म 6 में किए गए कथित बदलाव को ‘गैरकानूनी और एकतरफा’ बताया है।
राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अब इसमें कोई शक नहीं रह गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह उनके पद का इस्तेमाल कर भारतीय जनता पार्टी की मदद करने का एक और सबूत है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वह और इस मामले से जुड़े अन्य सभी लोगों को लोकतंत्र पर कथित हमले के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।
राहुल गांधी ने जिस दस्तावेज को साझा किया है, वह चुनाव आयोग की 26 सितंबर 2026 की प्रेस नोट है। इसमें फॉर्म 6 से जुड़े एक बिंदु में कहा गया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए फॉर्म 6 के साथ जोड़ा गया घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया है। वहीं, SIR की अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत लागू फॉर्म के इस्तेमाल की बात कही गई थी।
राहुल गांधी ने प्रेस नोट के इसी हिस्से को लाल रंग से चिन्हित करके साझा किया। चुनाव आयोग के इस दस्तावेज में SIR के दौरान नोटिस पाने वाले लोगों, बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा दस्तावेज जुटाने, सुनवाई और ECINet प्रणाली से जुड़े कई अन्य फैसलों का भी उल्लेख किया गया था।
राहुल गांधी के आरोप सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के बाद सामने आए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ फॉर्म 6 में कथित बदलाव और चुनाव आयोग के कामकाज से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि जब संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश किए जाएंगे, तब वह यह देखना चाहेंगे कि फॉर्म 6 में किसने और क्या बदलाव किया।
यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIR से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और संबंधित चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है।
फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। विवाद उस अतिरिक्त घोषणा को लेकर है, जिसे SIR के दौरान ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़े जाने की बात सामने आई। इस घोषणा में आवेदक से पूछा गया कि क्या उसका नाम या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची में दर्ज था।
इस कथित बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आने की रिपोर्टें हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर सवाल उठाए थे। उन्होंने नियमों में संशोधन किए बिना इस तरह का बदलाव किए जाने को लेकर आपत्ति जताई थी।
राहुल गांधी इससे पहले 1 अक्टूबर को भी फॉर्म 6 में कथित बदलाव का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि ऑनलाइन फॉर्म 6 को ‘गैरकानूनी’ तरीके से बदला गया। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया था कि चुनाव आयोग में किसने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को यह बदलाव करने का निर्देश दिया, कंपनी में किसने इसे मंजूरी दी और क्या इस बदलाव के लिए कंपनी पर किसी तरह का दबाव डाला गया था।
हालांकि, मौजूदा सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि ज्ञानेश कुमार ने व्यक्तिगत रूप से फॉर्म 6 में कोई गैरकानूनी या एकतरफा बदलाव किया था। अदालत ने संबंधित रिकॉर्ड और जवाब मांगे हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे मामले की जांच और सुनवाई होगी।
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