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चौतरफा संकट में घिरीं ममता बनर्जी! सिलीगुड़ी में FIR से लेकर वफादारों के इस्तीफे तक, चंद दिनों में अर्श से फर्श पर

पश्चिम बंगाल की सियासत में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के राजनीतिक सितारे गर्दिश में नजर आ रहे हैं। एक समय बंगाल पर एकछत्र राज करने वाली ममता इस समय अपने राजनीतिक करियर के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही हैं। बांग्लादेश मर्डर केस पर दिए उनके एक बयान से शुरू हुआ विवाद अब कानूनी शिकंजे, प्रशासनिक फेरबदल और पार्टी के भीतर बड़े विद्रोह में बदल चुका है। अमित शाह पर दिए ‘भूचाल’ वाले बयान को लेकर सिलीगुड़ी में दर्ज हुई FIR  उनकी बेहद करीबी नेता कृष्णा चक्रवर्ती के इस्तीफे ने टीएमसी खेमे में खलबली मचा दी है।

सिलीगुड़ी में FIR हुई दर्ज

विवाद की शुरुआत हाल ही में ममता बनर्जी द्वारा एक रैली में दिए गए एक बयान से हुई। उन्होंने बांग्लादेश के राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला था। ममता बनर्जी ने कहा था: “अगर मैंने अपना मुंह खोला, तो बांग्लादेश में भूचाल आ जाएगा।”

ममता के इस बयान के बाद सिलीगुड़ी के साइबर क्राइम थाने में भाजपा कार्यकर्ता और वकील रिंकी चटर्जी की शिकायत पर उनके खिलाफ एक गंभीर FIR दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान गैर-जिम्मेदाराना है, जिससे धार्मिक भावनाएं भड़क सकती हैं और भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय व राजनयिक संबंधों को नुकसान पहुंच सकता है।

🇧🇩 बांग्लादेश का कूटनीतिक रुख

इस अंतरराष्ट्रीय संवेदनशील मुद्दे पर बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने बेहद नपा-तुला रुख अपनाया है। उन्होंने हादी हत्याकांड के आरोपियों को वापस लाने के लिए भारत की केंद्र सरकार के साथ आधिकारिक बातचीत की बात स्वीकार की, लेकिन ममता बनर्जी के बयान को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए इस पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया।

मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने भी छोड़ा साथ

कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के बाद, अब कोलकाता से सटे हाई-प्रोफाइल इलाके विधाननगर पुरनिगम की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लगभग 16 साल से मेयर की कुर्सी संभाल रहीं और ममता की बेहद वफादार मानी जाने वाली कृष्णा चक्रवर्ती के इस कदम ने साफ कर दिया है कि कोलकाता के बाद अब विधाननगर निगम पर से भी टीएमसी का नियंत्रण पूरी तरह खो चुका है।

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विद्रोह

पार्टी के भीतर बगावत की आग इस कदर भड़क चुकी है कि टीएमसी के 58 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर खुद को असली विधायी दल घोषित करने की मांग की है और ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया है।

दिलचस्प बात यह है कि बागी धड़ा ममता बनर्जी को मुख्य सलाहकार बनाए रखने के पक्ष में तो है, लेकिन उन्होंने दो टूक कह दिया है कि अभिषेक बनर्जी की भूमिका को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह साफ तौर पर पार्टी के भीतर पारिवारिक और नए नेतृत्व के खिलाफ पुराने वफादारों का तख्तापलट है।

news desk

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