पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के बाद चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब एक संवैधानिक संस्था की तरह नहीं, बल्कि बीजेपी की आईटी सेल की तरह काम कर रहा है। उनका कहना है कि राज्य में चल रही विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है और जानबूझकर लोगों के नाम काटे जा रहे हैं।
ममता बनर्जी दोपहर करीब 4 बजे चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचीं। इस दौरान उनके साथ 13 ऐसे परिवारों के सदस्य भी थे, जो एसआईआर से प्रभावित बताए जा रहे हैं। टीएमसी का दावा है कि कई लोगों को गलत तरीके से ‘मृत’ घोषित कर दिया गया, जिसके कारण उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। पार्टी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के चलते 140 से 150 लोगों की मौत हो चुकी है और सबसे ज्यादा निशाना गरीब और अल्पसंख्यक वर्ग को बनाया गया है।
एसआईआर को लेकर क्यों भड़की ममता
सीईसी से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए ममता ने कहा कि एसआईआर के नाम पर वैध मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ऐसे मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा है, जिन्हें बीजेपी की आईटी सेल ने तैयार किया है, जो पूरी तरह अवैध और असंवैधानिक है। ममता ने कहा कि बूथ लेवल अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे राज्य में तनाव का माहौल है।
टीएमसी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुकी है और ममता लगातार चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को ‘मनमानी और अमानवीय’ बता रही हैं। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। बीजेपी नेता दिलीप घोष का कहना है कि ममता बनर्जी चुनाव में हार की आशंका से घबराकर एसआईआर का विरोध कर रही हैं।
चुनाव आयोग का दावा है कि एसआईआर का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को पारदर्शी और साफ करना है, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में सियासी तापमान लगातार बढ़ा रहा है।