लखनऊ। प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप मामले में यूपी एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अमित सिंह टाटा को लखनऊ से हिरासत में लिया है। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर अमित सिंह टाटा कौन है, जिसके चलते एसटीएफ को इतनी बड़ी कार्रवाई करनी पड़ी?
दरअसल, अमित सिंह टाटा कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध नेटवर्क का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर माना जाता है। वह इस पूरे सिंडिकेट के किंगपिन शुभम जायसवाल का बेहद करीबी बताया जाता है और नशे के बड़े नेटवर्क में “बिग फिश” के रूप में देखा जाता है।
सिंडिकेट का मास्टरमाइंड
सिंडिकेट का मास्टरमाइंड वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल 5 नवंबर को दुबई भाग चुका है।
- 18 अक्टूबर को सोनभद्र पुलिस ने इस सिंडिकेट का खुलासा किया था।
- 4 नवंबर को गाजियाबाद से सौरभ त्यागी की गिरफ्तारी हुई थी।
- इसके बाद शुभम जायसवाल फरार होकर दुबई पहुंच गया।
एसटीएफ के मुताबिक, अमित सिंह टाटा के करीबी लोग भी एजेंसी के रडार पर हैं। झारखंड से लेकर बांग्लादेश बॉर्डर तक कफ सिरप पहुंचाने में शामिल “आईडी” नामक व्यक्ति की तलाश अभी जारी है।
इस मामले पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि “उत्तर प्रदेश के हर कोने में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है और कोडीन सिरप धड़ल्ले से नशे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
अखिलेश ने पूरे मामले की विस्तृत जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की थी।
अवैध नेटवर्क की जड़ें गहरी
सूत्रों के अनुसार, अमित सिंह झारखंड में एक मेडिसिन फर्म के जरिए नशे का कारोबार चला रहा था और इसकी सप्लाई बांग्लादेश और नेपाल तक फैली हुई थी।
यह भी सामने आया है कि वाराणसी की कोतवाली में अमित सिंह के खिलाफ पहले से ही मुकदमा दर्ज है, जबकि उसकी फर्म और उसके पिता अशोक सिंह के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज है।
गौरतलब है कि कोडीन युक्त कफ सिरप, जिसे आमतौर पर खांसी की दवा माना जाता है, अब एक खतरनाक नशे का बड़ा हथियार बनकर सामने आया है। इसका अवैध नेटवर्क न केवल यूपी और बिहार बल्कि सीधे बांग्लादेश तक फैला हुआ है।
वाराणसी में करोड़ों की बरामदगी के बाद उठे सवालों ने पूरे प्रदेश के प्रशासन और ड्रग विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है. और इस पूरे रैकेट के केंद्र में माना जा रहा है एक नाम: शुभम जायसवाल, जो फिलहाल फरार है.
हम आपको आज उस काले साम्राज्य की बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने कोडीन युक्त कफ सिरप के सहारे समाज में मौत बाँटने का काम किया. साथ ही बताएंगे कि कैसे एक शख्स ने इसी काले कारोबार के दम पर महज कुछ सालों में अकूत दौलत का साम्राज्य खड़ा कर लिया.
वाराणसी का रहने वाला एक साधारण युवक शुभम जायसवाल महज तीन साल में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा. लेकिन यह दौलत किसी मेहनत, बिजनेस या स्टार्टअप की देन नहीं थी-बल्कि एक जहरीले कफ सिरप के काले कारोबार का नतीजा थी. यह वही जहर था जिसने न जाने कितनी जिंदगियां मौत के मुहाने पर पहुँचा दीं, लेकिन शुभम और उसके गिरोह के लिए यह “जहरीला सिरप” सोने की खान बन गया.
शुभम जायसवाल ने रांची में रजिस्टर्ड ‘शैली ट्रेडर्स’ के नाम से इस गोरखधंधे की शुरुआत की और कोडीन युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप की सप्लाई कई राज्यों में फैलानी शुरू कर दी. देखते ही देखते उसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान से लेकर बांग्लादेश की सीमा तक फैल गया। बस तीन साल में शुभम और उसके साथियों ने करोड़ों का काला साम्राज्य खड़ा कर लिया.