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चुनाव से पहले योगी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल, 6 विधायकों को मंत्री पद, क्या बदलेंगे UP के सियासी समीकरण?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से इस वक्त बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का रविवार को विस्तार किया गया।

लखनऊ के लोकभवन में आयोजित शपथ समारोह में भूपेंद्र चौधरी, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा, मनोज पांडे, कैलाश राजपूत और सुरेंद्र दिलेर को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके अलावा सोमेंद्र तोमर और अजीत सिंह पाल को भी मंत्री बनाया गया।

नए मंत्रियों को आनंदीबेन पटेल ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। जातीय संतुलन पर नजर डालें तो नए चेहरों में एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी और दो दलित समाज से शामिल हैं।

2027 के विधानसभा चुनावों से पहले इसे भाजपा का एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसमें संगठन के दिग्गजों और नए चेहरों को जगह देकर सोशल इंजीनियरिंग का सटीक तालमेल बैठाया गया है।

शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य रूप से इन चेहरों ने मंत्री पद की शपथ ली

  1. भूपेंद्र सिंह चौधरी: संगठन का अनुभव और जाट वोट बैंक : यूपी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मुरादाबाद के निवासी भूपेंद्र सिंह चौधरी को फिर से सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों के बीच उनकी मजबूत पकड़ भाजपा के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है। 2016 से MLC रहे चौधरी, पूर्व में पंचायती राज विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित कर चुके हैं।
  2. मनोज पांडे: सपा के किले में भाजपा की सेंध: इस फेरबदल का सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण नाम मनोज पांडे का है। रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक और सपा के पूर्व ‘चीफ व्हिप’ रहे मनोज पांडे अब योगी कैबिनेट का हिस्सा हैं। अवध और पूर्वांचल के बड़े ब्राह्मण नेता के तौर पर उनकी छवि भाजपा को उन क्षेत्रों में मजबूती देगी जहां सपा का प्रभाव रहा है।
  3. कृष्णा पासवान: संघर्ष से सत्ता तक का सफर: फतेहपुर की खागा सीट से 4 बार की विधायक कृष्णा पासवान को शामिल कर भाजपा ने महिलाओं और दलित वर्ग को बड़ा संदेश दिया है। आंगनवाड़ी वर्कर से अपना सफर शुरू करने वाली कृष्णा पासवान जिले की एक सशक्त दलित नेता हैं। उनकी साख और जमीनी पकड़ को देखते हुए उन्हें यूपी भाजपा का एक भरोसेमंद महिला चेहरा माना जाता है।
  4. सुरेंद्र दिलेर: विरासत और युवा जोश का संगम: हाथरस की राजनीतिक विरासत को संभालने वाले सुरेंद्र दिलेर (विधायक, खैर) को भी कैबिनेट में स्थान मिला है। उनके पिता स्वर्गीय राजवीर सिंह दिलेर और दादा किशन लाल दिलेर का क्षेत्र में गहरा प्रभाव रहा है। दलित युवा नेता के तौर पर सुरेंद्र दिलेर को आगे कर भाजपा ने अलीगढ़ और हाथरस बेल्ट में अपनी पकड़ और मजबूत की है।
  5. हंसराज विश्वकर्मा: जमीनी कार्यकर्ता को बड़ा सम्मान
    वाराणसी में भाजपा की जीत के शिल्पकारों में से एक, हंसराज विश्वकर्मा (MLC) का मंत्री बनना कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा उत्साह लेकर आया है। 1989 में बूथ स्तर से राजनीति शुरू करने वाले हंसराज पिछड़ा वर्ग की राजनीति में बड़ा नाम हैं। राम मंदिर आंदोलन में उनकी सक्रियता और वाराणसी में सांगठनिक मजबूती उनके चयन का मुख्य आधार बनी है।
  6. कैलाश सिंह राजपूत: कन्नौज के ‘अजेय’ योद्धा: कन्नौज की तिर्वा सीट से लगातार जीत दर्ज करने वाले कैलाश सिंह राजपूत को मंत्री बनाकर भाजपा ने लोध वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। 1996 से सक्रिय राजनीति में रहे कैलाश सिंह की अपने क्षेत्र में गहरी पैठ है, जो आगामी चुनावों में भाजपा के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

इस विस्तार के जरिए सीएम योगी ने ब्राह्मण, दलित, जाट और पिछड़ा वर्ग के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश की है। मनोज पांडे का शामिल होना विपक्ष के लिए एक मनोवैज्ञानिक हार की तरह देखा जा रहा है, वहीं पुराने दिग्गजों की वापसी से शासन में अनुभव को प्राथमिकता दी गई है।

साफ है कि मिशन 2027 के लिए भाजपा ने अपनी बिसात बिछा दी है। अब देखना यह होगा कि ये नए ‘सारथी’ चुनावी समर में भाजपा की नैया कितनी पार लगा पाते हैं।

news desk

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