दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा प्रसिद्ध लोक एवं भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद स्थानीय संगठन में जोरदार विरोध शुरू हो गया है. 25 वर्षीय मैथिली ठाकुर, जो मिथिला संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती हैं और हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से प्रेरित होकर 14 अक्टूबर 2025 को बीजेपी में शामिल हुई थीं, उनका नाम 15 अक्टूबर को बीजेपी की दूसरी सूची में शामिल किया गया.
हालांकि, पार्टी की यह रणनीतिक चाल स्थानीय कार्यकर्ताओं को रास नहीं आई और अलीनगर में बीजेपी का संगठन अब खुले विरोध के मूड में आ चुका है.
स्थानीय संगठन का तीखा विरोध
अलीनगर में बीजेपी के सातों मंडल अध्यक्षों ने संयुक्त रूप से मैथिली ठाकुर की उम्मीदवारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और स्थानीय नेता संजय उर्फ पप्पू सिंह को उम्मीदवार घोषित करने की मांग की है.
विरोध करने वाले मंडल अध्यक्षों में शामिल हैं: तारडीह पूर्वी – पुरुषोत्तम झा, तारडीह पश्चिमी – पंकज कंठ, घनश्यामपुर पूर्वी – सुधीर सिंह, घनश्यामपुर पश्चिमी – चंदन कुमार ठाकुर, नगर मंडल – रणजीत कुमार मिश्रा, अलीनगर पश्चिमी – गंगा प्रसाद यादव, अलीनगर पूर्वी – लाल मुखिया.
इन पदाधिकारियों का आरोप है कि “पिछले पांच सालों से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर किसी बाहरी चेहरे को लाया जा रहा है, जिसे पंचायतों और स्थानीय राजनीति की जमीनी समझ तक नहीं है।”
सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
स्थानीय कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर पार्टी हाईकमान ने अपना फैसला नहीं बदला तो— 7 मंडल अध्यक्ष, 61 कार्यकारी समिति सदस्य,38 पंचायत अध्यक्ष और 324 बूथ अध्यक्ष
सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देंगे.
मौजूदा विधायक का इस्तीफा भी विवाद से जुड़ा
अलीनगर के मौजूदा विधायक मिश्री लाल यादव ने भी 11 अक्टूबर 2025 को बीजेपी से इस्तीफा दे दिया, यह कहते हुए कि “मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई गई, पार्टी ने योगदान के बावजूद सम्मान नहीं दिया।”
यादव का इस्तीफा भी इस बात की ओर इशारा करता है कि स्थानीय नेतृत्व पहले से ही टिकट को लेकर नाराज था, और मैथिली ठाकुर की उम्मीदवारी ने आग में घी का काम किया है।
क्या बीजेपी नेतृत्व दबाव में झुकेगा?
बीजेपी की रणनीति मिथिलांचल में नए चेहरों को बढ़ावा देने की है, लेकिन मैथिली ठाकुर का टिकट पार्टी के भीतर फूट का कारण बनता दिख रहा है.
अब देखना होगा कि बीजेपी हाईकमान इस बगावत को संभाल पाता है या उम्मीदवार बदलने का बड़ा निर्णय लेता है.