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संसद में आज महिला आरक्षण-परिसीमन बिल पेश, 2029 से 273 सीटें महिलाओं के लिए? समझिए पूरा गणित

नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026: संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन आज लोकसभा में तीन बड़े विधेयक पेश किए गए — संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026। इनका मकसद नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को जमीन पर लागू करना है, ताकि 2029 लोकसभा चुनाव से महिलाओं को 33% आरक्षण मिल सके। सरकार का दावा है कि अगर ये बिल पास हो जाते हैं तो महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।

सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 से 850 के बीच की जा सकती हैं। कई रिपोर्ट्स में राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटों का मॉडल सामने आया है। इसका मतलब है कि कुल सीटों का एक-तिहाई यानी करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। यही वजह है कि यह बिल सिर्फ महिला आरक्षण नहीं, बल्कि देश की पूरी चुनावी राजनीति का नया नक्शा माना जा रहा है।

कैसे बदलेगा सीटों का गणित?

अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, जबकि प्रस्तावित मॉडल में इसे 850 तक ले जाने की चर्चा है। अगर ऐसा होता है तो महिलाओं के लिए लगभग 273 सीटें रिजर्व होंगी। संवैधानिक संशोधन होने की वजह से इस बिल को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा। यही कारण है कि सरकार को विपक्ष के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। कई विपक्षी दल महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन सीटों की बढ़ोतरी और परिसीमन के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।

बिल की सबसे अहम बात यह है कि 2011 जनगणना के आधार पर नया परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जो सीटों का नया आवंटन और सीमाओं का पुनर्निर्धारण करेगा। इसके बाद महिलाओं के लिए सीटें रोटेशन सिस्टम से अलग-अलग क्षेत्रों में तय होंगी। सरकार का कहना है कि किसी भी राज्य का मौजूदा अनुपात नहीं घटेगा, बल्कि अधिकांश राज्यों की सीटों में लगभग 50% तक बढ़ोतरी की जाएगी।

दक्षिणी राज्यों और विपक्ष की चिंता क्यों?

इस बिल पर सबसे ज्यादा बहस दक्षिणी राज्यों की सीट हिस्सेदारी को लेकर हो रही है। तमिलनाडु, केरल और कुछ अन्य राज्यों का कहना है कि अगर सिर्फ जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ तो उत्तर भारत को ज्यादा फायदा मिल सकता है। वहीं सरकार का दावा है कि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ाई जाएंगी, ताकि किसी क्षेत्र को नुकसान न हो।

विपक्षी INDIA गठबंधन ने साफ कहा है कि महिलाओं का 33% आरक्षण मौजूदा 543 सीटों पर भी लागू किया जा सकता है, इसलिए सीटें बढ़ाने की जरूरत पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस और कई क्षेत्रीय दल इसे राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश बता रहे हैं। तमिलनाडु में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गया है।

कुल मिलाकर, संसद का यह विशेष सत्र सिर्फ महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की संसदीय संरचना, राज्यों की हिस्सेदारी और 2029 की चुनावी राजनीति का बड़ा ब्लूप्रिंट बन सकता है। अगर बिल पास हो जाता है तो यह महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में सबसे बड़ा संवैधानिक बदलाव माना जाएगा।

news desk

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