Trending News

Swiggy-Zomato-Zepto पर कसेगा शिकंजा! महाराष्ट्र सरकार ला रही है कड़े डिलीवरी रूल्स, गिग वर्कर्स के लिए बड़ी राहत

भारत के महानगरों में महज कुछ मिनटों में खाना और ग्रॉसरी डिलीवर करने वाले क्विक-कॉमर्स और फूड डिलीवरी जायंट्स “स्विगी (Swiggy), ज़ोमैटो (Zomato) और ज़ेप्टो (Zepto)” पर अब महाराष्ट्र सरकार का शिकंजा कसने वाला है। राज्य सरकार इन कंपनियों के संचालन को पूरी तरह नियंत्रित करने और डिलीवरी पार्टर्स “गिग वर्कर्स” को सुरक्षित माहौल देने के लिए बाइक-टैक्सी और डिलीवरी नियमों में बड़े संशोधन करने की तैयारी में है। सरकार का कहना है की यह नया ड्राफ्ट न सिर्फ इन टेक कंपनियों के बिजनेस मॉडल को प्रभावित करेगा, बल्कि लाखों डिलीवरी बॉयज़ की जिंदगी में भी एक बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है।

नई गाइडलाइंस के मुख्य और कड़े प्रोविजन्स:

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की शत-प्रतिशत कम्पलसरी: सरकार के इस नए प्रस्ताव के तहत, इन प्लेटफॉर्म्स को अपने डिलीवरी नेटवर्क (बेड़े) को धीरे-धीरे पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलना होगा, जिससे बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके।

2% ड्राइवर वेलफेयर फंड: इस पूरी नीति का सबसे अहम पहलू गिग वर्कर्स के लिए है। कंपनियों को अपनी कुल कमाई का 2 प्रतिशत हिस्सा एक खास वेलफेयर फंड में जमा करना होगा।

कल्याणकारी योजनाओं का लाभ: इस फंड के जरिए डिलीवरी पार्टर्स को एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, मेडिकल कवर, पेंशन योजना, ईवी खरीदने के लिए आसान लोन और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

‘डिलिवरी सर्विस प्रोवाइडर’: संशोधन के बाद पार्सल, खाना और सामान डिलीवर करने वाली इन कंपनियों को आधिकारिक तौर पर ‘डिलिवरी सर्विस प्रोवाइडर’ के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, जिससे प्रशासन के लिए इन पर नजर रखना आसान हो जाएगा।

हाई-टेक सिक्योरिटी और लाइसेंस: सभी डिलीवरी वाहनों में जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग अनिवार्य होगी। इसके अलावा कंपनियों को रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) द्वारा तय किए गए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा और वैध लाइसेंस लेना होगा।

गिग वर्कर्स के लिए क्यों गेम-चेंजर साबित होगा यह कदम?

अब तक भारत के गिग इकॉनमी सेक्टर में काम करने वाले डिलीवरी पार्टर्स बिना किसी सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा), फिक्स्ड सैलरी या हेल्थ बेनिफिट्स के काम करते हैं। सड़क पर भारी ट्रैफिक और मुश्किल हालातों के बीच काम करने वाले इन युवाओं को दुर्घटना के समय भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महाराष्ट्र सरकार का यह कदम इन वर्कर्स को एक मजबूत कानूनी और वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

टेक कंपनियों की बढ़ी चिंताएं

दूसरी ओर, ज़ोमैटो, स्विगी और ज़ेप्टो जैसी कंपनियों के लिए यह नीति नए कम्प्लायंस और खर्चे लेकर आएगी। अपने मौजूदा पेट्रोल-डीजल वाले बेड़े को ईवी में बदलना और राजस्व का एक हिस्सा वेलफेयर फंड में देना कंपनियों के ऑपरेशनल खर्चों को बढ़ा सकता है।

फिलहाल, महाराष्ट्र सरकार के इस प्रस्तावित नियमों पर इंडस्ट्री के जानकारों की पैनी नजर है। जानकारों का मानना है कि अगर यह मॉडल महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक लागू होता है, तो देश के दूसरे राज्य भी गिग वर्कर्स के हितों की रक्षा के लिए इस तर्ज पर कड़े नियम बना सकते हैं।

news desk

Recent Posts

IND vs JPN: आखिरी ओवर में वाइड पर मचा घमासान, अंपायर से भिड़े श्रेयस-अक्षर, फिर बदला फैसला

भारत और जापान के बीच मंगलवार को खेला गया ऐतिहासिक टी20 मुकाबला नतीजे से ज्यादा…

10 hours ago

जमुई कांड में एनकाउंटर के बाद सियासी घमासान, संजय राउत ने बिहार सरकार पर साधा निशाना

बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित बदसलूकी के मामले में पुलिस की कार्रवाई…

11 hours ago

TRAI का बड़ा फैसला: अब बिना इंटरनेट के सस्ते रिचार्ज का रास्ता साफ, सिर्फ कॉलिंग और SMS वाले प्लान लाना अनिवार्य!

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अपने मोबाइल में इंटरनेट का इस्तेमाल…

11 hours ago

जमुई वायरल वीडियो मामले में 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR, नाबालिग की पहचान उजागर करने वालों पर पुलिस का शिकंजा

बिहार के जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से कथित बदसलूकी के मामले में पुलिस ने अब…

11 hours ago

संजय निषाद का BJP को संदेश: ‘नाव डूबने न दें’, अमित शाह-सुनील बंसल को लेकर कही बड़ी बात

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर सहयोगी दलों की भूमिका…

11 hours ago