दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में हर साल आयोजित होने वाली लव कुश रामलीला एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार यह आयोजन 22 सितंबर से शुरू होने जा रहा है. जिसमें कई चर्चित चेहरे अलग-अलग रामायण पात्रों की भूमिका निभाएंगे. लेकिन इससे पहले ही मंचन से जुड़ा एक बड़ा बदलाव सामने आया है. एक्ट्रेस पूनम पांडे को रामलीला से बाहर कर दिया गया है.
पहले मिली थी मंदोदरी की भूमिका
इस साल की रामलीला में पूनम पांडे को रावण की पत्नी मंदोदरी का किरदार निभाने के लिए चुना गया था. पूनम ने इस मौके को लेकर उत्साह भी जताया था और कहा था कि उन्हें एक ऐतिहासिक और धार्मिक मंच पर अभिनय करने का सौभाग्य मिला है. उन्होंने यह भी कहा था कि रामलीला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं. बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का उत्सव है.
वीएचपी और अन्य संगठनों का विरोध
बता दें कि पूनम पांडे को लेकर तुरंत ही विरोध शुरू हो गया. विश्व हिन्दू परिषद (VHP) और कई अन्य संगठनों ने इस चयन का विरोध करते हुए कहा कि पूनम की सार्वजनिक छवि मंदोदरी जैसे गरिमामय पात्र से मेल नहीं खाती. उनका कहना था कि रामलीला जैसे पवित्र मंच पर ऐसा निर्णय मर्यादा के खिलाफ है और इससे धार्मिक आस्थाएं आहत हो सकती हैं. बीजेपी नेता और रामलीला समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रवीण शंकर कपूर ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए एक पत्र जारी किया. उन्होंने कहा कि रामलीला जैसे सांस्कृतिक मंच को मनोरंजन या प्रचार का माध्यम नहीं बनाना चाहिए और समिति को अपना फैसला बदलना चाहिए.
समिति का बदला निर्णय
शुरुआत में रामलीला समिति ने पूनम को भूमिका देने के फैसले का बचाव किया था और कहा था कि समाज में बदलाव लाने और पूर्वाग्रह तोड़ने के लिए यह एक कदम है. लेकिन जैसे-जैसे विरोध बढ़ा, समिति ने अपना फैसला वापस लेते हुए पूनम पांडे को मंदोदरी की भूमिका से हटा दिया.
रावण की भूमिका में आर्य बब्बर बरकरार
इस विवाद के बीच एक चीज़ जस की तस रही. अभिनेता आर्य बब्बर इस बार भी रावण की भूमिका निभाते नजर आएंगे. इससे पहले वह टीवी शो ‘संकट मोचन महाबली हनुमान’ में भी रावण बन चुके हैं. उनका कहना है कि यह किरदार उन्हें हमेशा से आकर्षित करता है क्योंकि यह सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है.
रामलीला 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक
लव कुश रामलीला का यह भव्य आयोजन 22 सितंबर से 3 अक्टूबर 2025 तक दिल्ली के लाल किला मैदान में चलेगा. यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है. बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव का भी महत्वपूर्ण मंच बन चुका है. हर साल की तरह इस बार भी लाखों की संख्या में दर्शक इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनने की उम्मीद कर रहे हैं.