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UP में 1 अप्रैल से महंगी होगी शराब: जानें कितने बढ़े दाम, पहली बार आएगा 100ML ‘बच्चा’ पैक

मौजूदा समय में बड़ी संख्या में लोग शराब पीना पसंद करते हैं। हालांकि, कई लोग महंगी शराब खरीदने में सक्षम नहीं होते और मजबूरी में सस्ती शराब का सेवन करते हैं, जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ता है।

वैसे तो शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी, समारोह और शादियों में लोग जमकर शराब का उपयोग करते हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब को लेकर बड़ा कदम उठाया है।

दरअसल यूपी की नई आबकारी नीति मंजूर मिल गई है और 1 अप्रैल से देसी और अंग्रेजी शराब महंगी हो जाएगी। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य की नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। नई नीति के तहत देसी और अंग्रेजी शराब की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, जबकि सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी से ₹71,278 करोड़ का राजस्व लक्ष्य तय किया है।

देसी शराब के दाम बढ़े

नई दरों के मुताबिक 36% अल्कोहल वाली देसी शराब की कीमत ₹165 से बढ़ाकर ₹173 प्रति बोतल कर दी गई है। यानी प्रति बोतल करीब ₹5 की वृद्धि हुई है। इसी आधार पर हाफ क्वॉर्टर और 100 एमएल पैक के दाम भी बढ़ेंगे। अन्य श्रेणी की शराब की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

अंग्रेजी शराब और बीयर भी महंगी

नई नीति लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब की कीमतों में ₹10 से ₹30 तक की बढ़ोतरी होगी। अंग्रेजी शराब की फुटकर दुकानों की लाइसेंस फीस में 7.5% की वृद्धि की गई है। यही 7.5% बढ़ोतरी बीयर पर भी लागू होगी।

ई-लॉटरी से होगा आवंटन

शराब की फुटकर दुकानों का आवंटन अब ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में देसी शराब की दुकानों का कोटा घटाया जाएगा।

नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ जैसे शहरों में लो-अल्कोहलिक स्ट्रेंथ बेवरेज (बीयर, वाइन और आरटीडी) के लिए अलग से लाइसेंस जारी किए जाएंगे।

‘बच्चा’ पैक पहली बार बाजार में

नई आबकारी नीति में पहली बार 100 एमएल का मिनिएचर पैक ‘बच्चा’ लॉन्च किया गया है। 42.8 डिग्री तीव्रता वाला यह पैक बाजार में ₹50 में उपलब्ध होगा।

निर्यात को भी बढ़ावा

राज्य में निर्मित शराब और अन्य आबकारी उत्पादों के निर्यात को भी नीति में प्रोत्साहन दिया गया है, जिससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।

नई नीति को कोटेदारों (अनुज्ञापियों) को राहत देने वाली बताया जा रहा है, जबकि सरकार का लक्ष्य राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि करना है।

news desk

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