उन्नाव रेप कांड के मुख्य दोषी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। जिसमें उसने पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में अपनी 10 साल की सजा को ससपेंड करने की मांग की थी।
पिता की मौत मामले में राहत नहीं
सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रविंद्र दुदेजा ने पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत (कस्टोडियल डेथ) के मामले में सेंगर की याचिका खारिज कर दी। सेंगर ने कहा कि वो साढ़े सात साल जेल में काट चुका है और उसकी तबीयत (डायबिटीज और आंख की समस्या) ठीक नहीं है। अदालत ने इन सभी दलीलों को अपर्याप्त माना और कहा कि इस मामले की मुख्य अपील पर 3 फरवरी 2026 को अंतिम सुनवाई की जाएगी।
सेंगर की रिहाई की उम्मीदों पर सबसे बड़ा प्रहार पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप केस (उम्रकैद) में सेंगर को जमानत दे दी थी, लेकिन CBI की दलीलों ने सुप्रीम कोर्ट को इस पर रोक लगाने के लिए मजबूर कर दिया:
सीबीआई ने जोर देकर कहा कि अगर सेंगर बाहर आता है, तो पीड़िता और उसके गवाहों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए सेंगर की रिहाई पर ‘स्टे’ लगा दिया।
क्या था कस्टोडियल डेथ मामला?
यह मामला अप्रैल 2018 का है, जब रेप पीड़िता के पिता को अवैध हथियार रखने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि सेंगर के इशारे पर उनके साथ हिरासत में बर्बरता की गई, जिसके कारण 9 अप्रैल 2018 को उनकी मृत्यु हो गई। इस साजिश के लिए मार्च 2020 में दिल्ली की एक अदालत ने सेंगर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
3 फरवरी 2026
अब सबकी नजरें 3 फरवरी पर टिकी हैं, जब दिल्ली हाईकोर्ट पिता की मौत वाले मामले में अंतिम बहस सुनेगा। अगर वहां भी सेंगर को राहत नहीं मिलती, तो उसे अपनी पूरी सजा जेल में ही काटनी होगी।