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ममता बनर्जी की TMC को छोड़ना पड़ेगा पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न? EC के आदेश के बाद सौंपे 3 नए विकल्प

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद नया मोड़ ले चुका है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी ने अपनी पसंद के तीन नए नाम और चुनाव चिह्न आयोग को सौंपे हैं। हालांकि, यह जवाब उन्होंने कड़े विरोध के साथ दाखिल किया है। अब सवाल है कि आयोग के आदेश के तहत दोनों गुटों को किस नाम और निशान के साथ चुनाव लड़ना होगा?

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए क्या आदेश दिया?

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच बंटवारे को स्वीकार करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है। इसके तहत दोनों में से कोई भी गुट ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) का नाम या उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

दोनों गुटों को अब अलग-अलग नाम और आयोग की ओर से आवंटित नए चुनाव चिह्नों के साथ उपचुनाव लड़ना होगा। यह व्यवस्था विवाद का अंतिम निपटारा होने तक लागू रहेगी।

ममता बनर्जी ने विरोध के साथ सौंपे तीन नाम और निशान

सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने गुरुवार रात 11:36 बजे चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश का जवाब दाखिल किया। इसमें उन्होंने अपनी पसंद के तीन नाम और चुनाव चिह्न दिए। हालांकि, यह जवाब आयोग के फैसले के कड़े विरोध के साथ सौंपा गया।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में उन तीनों नामों और चुनाव चिह्नों का विवरण नहीं दिया गया है।

अंतरिम आदेश क्यों जारी करना पड़ा?

चुनाव आयोग के मुताबिक, दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों ने असली पार्टी होने का दावा किया है। इसी वजह से आयोग को चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत मामले पर फैसला लेने की जरूरत पड़ी।

आयोग ने कहा कि पिछले मामलों और उदाहरणों के आधार पर लिया गया यह अंतरिम कदम दोनों पक्षों को बिना किसी पक्षपात के समान स्थिति में रखेगा।

जुलाई में आयोग तक पहुंचा था पार्टी पर नियंत्रण का विवाद

टीएमसी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद इस साल जुलाई में चुनाव आयोग तक पहुंचा था। उस समय दोनों पक्षों ने पार्टी पर अपना-अपना दावा पेश किया था।

इसके बाद आयोग ने संगठनात्मक नियंत्रण, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं, पार्टी की संपत्तियों, नाम और चुनाव चिह्न समेत कई अहम मुद्दों पर दोनों गुटों से जवाब मांगे। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपने दस्तावेज जमा कर चुके हैं और आयोग के समक्ष पेश भी हुए हैं।

अब अंतिम फैसले तक क्या होगा?

चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश फिलहाल दोनों गुटों को पार्टी के पुराने नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोकता है। उपचुनाव में उन्हें अलग-अलग नामों और नए आवंटित निशानों के साथ उतरना होगा।

पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और नियंत्रण को लेकर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।

vineet verma

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