ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच बड़ी खबर यह है कि अमेरिका ने अपने कदम पीछे कर लिए हैं और ईरान से बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने का संकेत दिया है। पिछले दिनों तक जो तनातनी तेज थी, वह अचानक कमजोर दिखाई देने लगी, जिसे ईरान के अली लारीजानी की रणनीति से जोड़ा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अली लारीजानी के कड़े तेवर और उनकी समझदारी भरी रणनीति के कारण अमेरिका को अपने कदम पीछे हटाने पड़े हैं। अली लारीजानी को 2025 में ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा परिषद का सचिव बनाया गया था। सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी माने जाने वाले लारीजानी ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अपने तेवर मजबूत रखे और संतुलित कूटनीति से अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर किया।
अली लारीजानी का जन्म 3 जून 1958 को एक प्रभावशाली शिया मुस्लिम परिवार में हुआ। उन्होंने इस्लामिक गार्ड्स में कमांडर से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में 2005 में राष्ट्रपति पद के लिए भी चुनाव लड़ा, हालांकि हार गए। सुप्रीम लीडर खामेनेई के करीबी होने के कारण उनका ईरान में दबदबा बढ़ा।
सुरक्षा परिषद के प्रमुख बनने के बाद लारीजानी ने सऊदी अरब और अन्य अरब देशों से संबंध सुधारने के लिए कई दौर की बातचीत की। सितंबर 2025 में उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश की। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, इसी रणनीति के तहत अरब देशों ने अमेरिका को ईरान पर हमला न करने के लिए चेतावनी दी।
इसके अलावा, ईरान में हो रहे प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए लारीजानी ने ईरान सेना में अहम बदलाव किए। अहमद वाहिदी को उप कमांडर नियुक्त किया गया और ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया को सेना का प्रवक्ता बनाया गया। लारीजानी ने मीडिया के जरिए जनता को यह भी बताया कि अमेरिकी और इजराइली ताकतें ईरान में अशांति भड़काने की कोशिश कर रही थीं।
कुल मिलाकर फिलहाल जंग की आहट कमजोर दिख रही है और ईरान में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। हालांकि, अमेरिका की नीति और ईरान पर नजर अभी भी बनी हुई है, और भविष्य में स्थिति कैसे बदलती है, यह देखने वाली बात होगी।
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