तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली। केरल (केरलम) विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने दक्षिण भारत की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना के रुझान संकेत दे रहे हैं कि इस बार केरल की जनता ने ‘बदलाव’ का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ (LDF) सरकार, जो लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की ऐतिहासिक कोशिश कर रही थी, फिलहाल पिछड़ती नजर आ रही है।
यूडीएफ (UDF) ने पार किया बहुमत का जादुई आंकड़ा
शुरुआती रुझानों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत की दहलीज को पार कर लिया है।
- बहुमत की ओर: ताजा आंकड़ों के अनुसार, यूडीएफ 87 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो कि 70 सीटों के बहुमत के आंकड़े से कहीं अधिक है।
- एलडीएफ को बड़ा झटका: सत्तारूढ़ एलडीएफ महज 49 सीटों पर सिमटती दिख रही है, जो पिछले चुनाव के मुकाबले 38 सीटों का भारी नुकसान है।
- बीजेपी का खाता: एनडीए (NDA) राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए 3 सीटों पर आगे चल रही है।
दिग्गज पिछड़ रहे, स्वास्थ्य मंत्री भी संकट में
रुझानों में न केवल सीटों का अंतर बढ़ रहा है, बल्कि कई हाई-प्रोफाइल चेहरे भी अपनी सीटों पर संघर्ष कर रहे हैं:
- मंत्री वीना जॉर्ज पीछे: अरनमूला निर्वाचन क्षेत्र से एलडीएफ की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज पीछे चल रही हैं, यहाँ कांग्रेस के अबिन वर्गी ने बढ़त बना ली है।
- सीएम विजयन की स्थिति: शुरुआती रुझानों में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के पिछड़ने की खबरें भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
केरल विधानसभा रुझान: एक नज़र में (Live Data)
| गठबंधन | वर्तमान बढ़त (Leads) | पिछले चुनाव (+/-) |
| UDF (कांग्रेस+) | 87 | +47 |
| LDF (लेफ्ट+) | 49 | -38 |
| NDA (बीजेपी+) | 03 | +03 |
9 अप्रैल का मतदान और चुनावी गणित
केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को 78.27 प्रतिशत का भारी मतदान हुआ था। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने मतगणना शुरू होने से पहले ही जीत का भरोसा जताया था, जो अब रुझानों में सच साबित होता दिख रहा है। वहीं, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पीके कृष्णदास ने राज्य में ‘त्रिध्रुवीय’ मुकाबले का दावा किया था, जिसके संकेत एनडीए की कुछ सीटों पर बढ़त से मिल रहे हैं।
क्या केरल में टूटेगा 40 साल का रिकॉर्ड?
केरल में पारंपरिक रूप से हर पांच साल में सत्ता बदलने का रिवाज रहा है, जिसे 2021 में एलडीएफ ने तोड़ा था। लेकिन 2026 के रुझान बता रहे हैं कि कांग्रेस अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने में सफल रही है। यदि ये रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो यह यूडीएफ के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित होगी।