नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2025: कर्नाटक में राज्य सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के बीच छिड़े विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तूल पकड़ ली है. इस बीच, कांग्रेस नेता उदित राज ने आरएसएस की विचारधारा को ‘जहरीला’ बताते हुए दलितों और पिछड़े वर्गों से दूरी बनाने की अपील की है. मीडिया से बातचीत में उदितराज का यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है.
आरएसएस पर निशाना साधते हुए उदितराज ने कहा, “ऐसी जहरीली विचारधाराओं से दूरी बनाए रखनी चाहिए क्योंकि यह विचारधारा दलितों और पिछड़ों से नौकरियां और शिक्षा छीनती है” यह बयान कर्नाटक के विवाद को बिहार की राजनीति से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. बिहार में 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि 14 नवंबर को नतीजे घोषित होंगे.
बिहार जाति जनगणना: 85% आबादी दलित-पिछड़ी, कांग्रेस का संदेश साफ
सूत्रों का मानना है कि उदित राज का बयान बिहार की 2023 जाति जनगणना रिपोर्ट के आंकड़ों पर आधारित है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में अन्य पिछड़ा वर्ग OBC की हिस्सेदारी 27.13% और EBC की 36.01% है, जो मिलाकर 63.14% बनता है. इसके अलावा, अनुसूचित जाति SC की आबादी 19.65% और अनुसूचित जनजाति ST की 1.68% है. यानी दलितों और पिछड़ों की कुल आबादी लगभग 85% है. उदित राज के बयान से साफ है कि पार्टी 85% वोटरों को यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा और RSS की ‘जहरीली विचारधारा’ इन वर्गों को उनके अधिकारों से वंचित रखती है.
बिहार चुनाव पर असर?
यह विवाद बिहार चुनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां दलित-पिछड़ा वोट निर्णायक भूमिका निभाएगा. कांग्रेस की ‘वोटर बचाओ यात्रा’ और इंडिया गठबंधन की रणनीति भी इसी दिशा में है. विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर ध्रुवीकरण को तेज कर सकता है, जो भाजपा-कांग्रेस के बीच जंग को और तेज कर देगा.