कानपुर के लैंबॉर्गिनी कार मामले में अदालत ने जब्त की गई लग्जरी कार को रिलीज़ करने का आदेश दे दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वाहन मालिक को कार सुपुर्द करने का निर्देश दिया। करीब 20 दिनों से यह महंगी कार ग्वालटोली थाने में खड़ी थी।
जानकारी के मुताबिक, वाहन संख्या DL 11CN 4018 (लैंबॉर्गिनी) को पुलिस ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 203 समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई करते हुए सीज किया था। अब अदालत ने स्पष्ट किया है कि वाहन मालिक 8.30 करोड़ रुपये की जमानत राशि के बराबर अंडरटेकिंग जमा करेगा, जिसके बाद कार को रिलीज़ किया जाएगा। अदालत का यह आदेश काफी चर्चा में है, क्योंकि इतनी बड़ी रकम की अंडरटेकिंग पर वाहन रिहा करने के मामले कम ही देखने को मिलते हैं।
बताया जा रहा है कि इस मामले की सुनवाई से पहले दो अलग-अलग अदालतों ने इसे लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सीजेएस सूरज मिश्रा की अदालत में पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया गया। अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि वाहन लंबे समय से थाने में खड़ा है और उसे उचित शर्तों के साथ मालिक को सौंपा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि यह मामला सात फरवरी का है, जब शहर के बड़े तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम् मिश्रा पर आरोप लगा था कि उन्होंने अपनी लैंबॉर्गिनी कार से भैरौघाट चौराहे के पास कई लोगों को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में छह लोग घायल हुए थे। घटना के बाद शिवम् मिश्रा के मौके से भागने का वीडियो भी सामने आया था, जिससे मामला और अधिक हाई प्रोफाइल बन गया था।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शिवम मिश्रा को गिरफ्तार किया था, लेकिन आरोप जमानती धाराओं में दर्ज होने के कारण उन्हें बाद में अदालत से जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद उनकी ओर से कार को रिलीज़ करने के लिए अर्जी दाखिल की गई थी। अब अदालत के आदेश के बाद 8.30 करोड़ रुपये की अंडरटेकिंग जमा करने पर यह लग्जरी कार दोबारा मालिक को सौंप दी जाएगी।