कानपुर के चर्चित “लैंबोर्गिनी कांड” में जांच आगे बढ़ने के साथ हर दिन नए सवाल और नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच, CCTV फुटेज और आरोपी परिवार के अलग-अलग दावों ने पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
रविवार को ग्वालटोली इलाके की VIP रोड पर करीब 10 करोड़ रुपये की लग्जरी लैंबोर्गिनी कार कई वाहनों और लोगों से टकरा गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज कर कार को जब्त कर लिया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि हादसे के समय कार चला कौन रहा था। पुलिस का कहना है कि CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान शिवम मिश्रा को ड्राइविंग सीट पर दिखाते हैं, जबकि परिवार और वकील का दावा है कि कार एक ड्राइवर चला रहा था। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद बाउंसर दूसरी SUV से उतरकर कार की ओर दौड़ते दिखे, जिससे मामला और संदेहास्पद हो गया।
इस बीच आरोपी पक्ष ने दावा किया है कि शिवम मिश्रा को मिर्गी (एपिलेप्सी) की बीमारी है और ड्राइविंग के दौरान दौरा पड़ने से हादसा हुआ हो सकता है। पुलिस इस दावे की भी मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर जांच कर रही है।
हाई-प्रोफाइल होने की वजह से इस केस में पुलिस पर शुरुआती कार्रवाई को लेकर VIP ट्रीटमेंट के आरोप भी लगे, जिसके बाद एक थाना प्रभारी को हटाने जैसी कार्रवाई की गई। सरकार की ओर से भी साफ संकेत दिए गए हैं कि दोषी कोई भी हो, सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जांच निर्णायक चरण में है और अब CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच ही तय करेगी कि हादसे के समय कार किसके हाथ में थी और अंतिम कार्रवाई किस पर होगी।