कानपुर की वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को हुए हाई-प्रोफाइल सड़क हादसे ने एक बार फिर कानून और रसूख की बहस को गर्म कर दिया है। आरोप के अनुसार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की करीब 10 करोड़ रुपये कीमत वाली Lamborghini Revuelto तेज रफ्तार में अनियंत्रित होकर ऑटो-रिक्शा और बुलेट बाइक समेत छह लोगों को टक्कर मारती चली गई। हादसा इतना भयानक था कि बुलेट सवार करीब 10 फीट हवा में उछल गया और कार अंत में बिजली के खंभे से टकराकर रुकी।
हादसे के बाद पहले दावा किया गया कि कार ड्राइवर चला रहा था, लेकिन मामला तेजी से पलटता गया और पुलिस जांच में कई सवाल खड़े हो गए।
कोर्ट में ड्राइवर का चौंकाने वाला बयान
बुधवार को ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में सरेंडर करते हुए कहा कि हादसे के समय “साहब को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा, जिससे गाड़ी बेकाबू हो गई और मैं डर गया।” उसने यह भी कहा कि ऑटो-लॉक सिस्टम के कारण वह तुरंत बाहर नहीं निकल पाया। इस बयान के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया और जांच एजेंसियां अब मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।
गिरफ्तारी के कुछ घंटों में जमानत
12 फरवरी को शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां पुलिस ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत मांगी। हालांकि अदालत ने कहा कि जब पीड़ित पक्ष पहले ही समझौता कर चुका है तो हिरासत की जरूरत क्या है। पुलिस ठोस जवाब नहीं दे पाई और कोर्ट ने मात्र 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर शिवम को जमानत दे दी। गिरफ्तारी के लगभग 6–7 घंटे के भीतर ही उन्हें रिहा कर दिया गया।
घटना के बाद एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें बाउंसरों द्वारा कार की नंबर प्लेट हटाने की कोशिश दिखाई दी। शुरुआती FIR में ड्राइवर “अज्ञात” बताया गया था, जिसे बाद में बदलना पड़ा और थाना प्रभारी को निलंबित भी कर दिया गया। फिलहाल पुलिस ने Lamborghini जब्त कर ली है और CCTV फुटेज, फॉरेंसिक जांच तथा मेडिकल परीक्षण के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे की असली वजह क्या थी।
सोशल मीडिया पर लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या पैसा और रसूख कानून से ऊपर है या फिर जांच के बाद सच सामने आएगा।