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कानपुर: मां के कटे हाथ को लेकर कमिश्नर दफ्तर पहुंचे ITBP जवान, ‘घेराव’ की खबरों पर कमांडेंट ने दी बड़ी सफाई

कानपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आईटीबीपी (ITBP) जवान विकास सिंह की मां का इलाज के दौरान हाथ काटे जाने का मामला अब एक बेहद संवेदनशील और बड़े विवाद में तब्दील हो चुका है। शनिवार सुबह इस मामले ने उस समय एक अभूतपूर्व मोड़ ले लिया जब यह पूरा प्रकरण ‘खाकी बनाम खाकी’ (स्थानीय पुलिस बनाम देश के सुरक्षा बल) की लड़ाई बन गया।

स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज आईटीबीपी के करीब 100 हथियारबंद जवानों ने शनिवार सुबह ठीक 11:15 बजे कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया। जवानों के इस औचक कदम से कमिश्नर दफ्तर में हड़कंप मच गया और वहां भारी सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में आईटीबीपी (ITBP) जवान की मां का इलाज के दौरान हाथ काटे जाने के बाद शनिवार सुबह पुलिस कमिश्नर कार्यालय में हुए हाईवोल्टेज ड्रामे और घेराव की खबरों पर अब अर्धसैनिक बल की तरफ से एक बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक स्पष्टीकरण और सफाई सामने आई है। सोशल मीडिया और मीडिया के एक वर्ग में ‘100 जवानों द्वारा पुलिस मुख्यालय के घेराव’ की चल रही खबरों को आईटीबीपी के शीर्ष अधिकारियों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

इस पूरे प्रकरण में मचे देशव्यापी बवाल के बीच आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद ने खुद सामने आकर स्थिति को स्पष्ट किया है और मामले को एक नया कूटनीतिक मोड़ दे दिया है।

“घेराव नहीं, यह सिर्फ एक आधिकारिक मुलाकात थी”

आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद ने मीडिया में चल रही ‘घेराव और खाकी बनाम अर्धसैनिक बल’ की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा:

“हम किसी भी तरह से पुलिस कमिश्नर कार्यालय (कमिश्नर हाउस) को घेरने या वहां कोई प्रदर्शन करने नहीं आए थे। हमारे जवान विकास सिंह की माता जी का इलाज के दौरान हाथ कटने का एक बेहद संवेदनशील मामला था। इसी सिलसिले में हम अपने पीड़ित जवान के साथ और कानून-व्यवस्था के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस कमिश्नर से केवल मुलाकात करने और पूरी घटना की जानकारी देने आए थे।”

कमांडेंट ने साफ शब्दों में कहा कि जवानों की मौजूदगी को मीडिया के एक हिस्से ने गलत रूप में पेश कर दिया और इसे ‘घेराव’ का नाम दे दिया, जो कि हकीकत से परे है।

“हमें कानपुर पुलिस पर पूरा विश्वास है”

जवान विकास सिंह द्वारा पहले लगाए गए आरोपों के विपरीत, आईटीबीपी के कमांडेंट ने स्थानीय पुलिस प्रशासन और खाकी के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता और विश्वास जताया है। कमांडेंट गौरव प्रसाद ने दो टूक कहा:

  • प्रशासन पर भरोसा: “हमें इस पूरे मामले की तफ्तीश में कानपुर पुलिस और यहां के पुलिस कमिश्नर पर पूरा विश्वास है।”
  • जांच में सहयोग: उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन इस मामले की तह तक जाएगा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएगा।

दोनों तरफ से आई सफाई, तनाव हुआ शांत

कमांडेंट गौरव प्रसाद की इस आधिकारिक सफाई और पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के साथ हुई मैराथन बैठक के बाद सुबह से चल रहा भारी तनाव अब पूरी तरह शांत हो गया है। कानपुर पुलिस के आला अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा बलों के बीच कोई टकराव नहीं है।

‘सिल्वर डिब्बे’ में मां का कटा हाथ और सिस्टम की बेरुखी

पूरा मामला महाराजपुर स्थित 32 बटालियन के आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां निर्मला देवी से जुड़ा है। विकास सिंह ने सांस की तकलीफ के चलते अपनी मां को 13 मई को टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। आरोप है कि गलत इलाज या लापरवाही के कारण उनकी मां का हाथ धीरे-धीरे काला पड़ने लगा और संक्रमण (Infection) इस कदर फैला कि 17 मई को पारस हॉस्पिटल में डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए वह हाथ काटना पड़ा।

कमिश्नर दफ्तर में खौफनाक मंजर: > इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे जवान विकास सिंह बीते 20 मई को अपनी मां का कटा हुआ हाथ एक डिब्बे में लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए थे। इस खौफनाक और लाचार कर देने वाले मंजर को देखने के बाद पुलिस कमिश्नर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से तुरंत जांच रिपोर्ट मांगी थी।

अस्पताल को बचाने वाली ‘संभावनाओं वाली रिपोर्ट’ पर भड़का गुस्सा

शनिवार को आईटीबीपी के कमांडो और अफसरों का गुस्सा तब भड़क उठा, जब स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आई। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक, यह रिपोर्ट पूरी तरह से अस्पष्ट और महज संभावनाओं पर आधारित है।

डॉक्टरों को बचाने की कोशिश: रिपोर्ट में कहा गया है कि हाथ में इन्फेक्शन ‘धर्मा एम्बोलिज्म’ (खून का थक्का बनना) की वजह से हो सकता है।

रिपोर्ट में इस बात का कहीं कोई जिक्र नहीं है कि अस्पताल के आईसीयू (ICU) या वार्ड में इलाज के दौरान यह गंभीर स्थिति आखिर बनी कैसे? आईटीबीपी के अफसरों ने सीधे आरोप लगाया कि सीएमओ की मेडिकल टीम ने आरोपी अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों को बचाने के लिए यह क्लीनचिट जैसी रिपोर्ट तैयार की है।

कमिश्नर दफ्तर छावनी में तब्दील, री-इन्वेस्टिगेशन के आदेश

शनिवार सुबह जब गाड़ियों में भरकर आए आईटीबीपी के जवानों ने कमिश्नर दफ्तर को घेरा तो पुलिस महकमे के हाथ-पांव फूल गए। आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद और लाइजनिंग अफसर अर्पित ने पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) डॉ. विपिन ताडा के साथ बंद कमरे में करीब एक घंटे तक मैराथन बैठक की।

कानून-व्यवस्था के आला अधिकारी का बयान

अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि पीड़ित जवान और आईटीबीपी के अधिकारी स्वास्थ्य विभाग की पहली जांच से पूरी तरह असंतुष्ट थे। उनकी आपत्तियों को देखते हुए तुरंत सीएमओ (CMO) को मौके पर तलब किया गया। पीड़ित परिवार जिन बिंदुओं पर असंतुष्ट है, उन सभी की पुनः (नए सिरे से) निष्पक्ष जांच करने के लिखित आदेश दे दिए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि नई उच्च स्तरीय जांच में जो भी डॉक्टर या अस्पताल प्रबंधन दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

news desk

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