IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई, लंदन में JP Morgan जैसी वैश्विक कंपनी में हाई-पेइंग जॉब, और फिर देश सेवा के जुनून में 68वीं ऑल इंडिया रैंक के साथ IAS बनना-दिव्या मित्तल की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। हालांकि, उत्तर प्रदेश कैडर (2013 बैच) की इस तेज-तर्रार और जनता के बीच बेहद लोकप्रिय IAS अधिकारी ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
आईआइएम और लंदन की सुख-सुविधाएं छोड़कर भारत लौटने वाली दिव्या मित्तल का यह फैसला केवल एक प्रशासनिक अफसर के पद छोड़ने की खबर नहीं है, बल्कि यह कहानी है एक ऐसी अफसर की जिसने सत्ता और राजनीतिक दबाव के सामने झुकने के बजाय अपनी बेबाक कार्यशैली को प्राथमिकता दी।
दिव्या मित्तल के प्रशासनिक करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव मिर्जापुर की जिलाधिकारी (DM) के रूप में रहा। दूरदराज के पथरीले पहाड़ी गांव लहुरियादह में आजादी के दशकों बाद पाइपलाइन से पानी पहुंचाना उनकी कार्यशैली का सबसे बड़ा उदाहरण बना। ‘जनचौपाल’ के जरिए सीधे ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के उनके अंदाज ने उन्हें जनता का चहेता बना दिया।
हालांकि, सफलता के साथ विवाद भी जुड़े:
जुलाई 2025 में देवरिया की DM रहते हुए दिव्या मित्तल एक बार फिर तब सुर्खियों में आईं, जब DISHA की आधिकारिक बैठक में उन्होंने ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल पर करारा प्रहार किया।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले के लिए प्रशासन पर गैर-वाजिब दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके इस बयान पर यूपी सरकार के तत्कालीन कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और देवरिया विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। मंत्री ने इसे जनप्रतिनिधियों की अनदेखी बताया, तो विधायक ने उन्हें प्रशासनिक दायरा याद दिलाया। हालांकि, इस घटना ने दिव्या मित्तल की ‘निडर और निष्पक्ष अफसर’ वाली छवि पर मुहर लगा दी।
इस्तीफे की घोषणा के साथ दिव्या मित्तल ने एक बेहद मार्मिक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि विदेश में शानदार करियर के बावजूद उन्हें हमेशा अपनी मिट्टी का कर्ज चुकाने की तड़प महसूस होती थी।
देवरिया और मिर्जापुर के अपने अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने लिखा:
“मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई हूं, सच यह है कि सबसे ज्यादा मैंने ही पाया।”
13 सालों के सेवाकाल के बाद दिव्या मित्तल का इस्तीफा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अधिकारियों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक स्वायत्तता और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच के संतुलन पर कई सवाल छोड़ गया है।
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