जीतन राम मांझी सीट शेयरिंग विवाद
NDA में सीट शेयरिंग पर फिर फंसा पेंच. एनडीए के अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगे हैं. हम पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बोधगया और मखदूमपुर सीट पर चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है. जिससे एक बार फिर ये सवाल उठ रहा है कि NDA का कैसा गठबंधन है ये ?
बता दें कि 12 अक्टूबर को एनडीए में सीट बंटवारे की घोषणा हुई थी. भाजपा और जदयू को 101–101 सीटें मिलीं, वहीं चिराग पासवान को 29, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को 6–6 सीटें दी गईं. लेकिन मांझी इससे संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि उन्होंने 15 सीटों का दावा किया था और उन्हें केवल 6 सीटें देकर अन्य सहयोगी दलों के प्रत्याशी उनके प्रभाव वाले इलाकों में उतार दिए गए.
मांझी का NDA पर हमला
मीडिया से बात करते हुए मांझी ने कहा, जब सीट बंटवारा हो चुका है तो फिर सहयोगी दल आपसी सीटों पर उम्मीदवार क्यों उतार रहे हैं? यह कहां का न्याय है
मांझी ने यह भी साफ कर दिया कि “हम” पार्टी बोधगया और मखदूमपुर से चिराग के खिलाफ उम्मीदवार खड़े करेगी भले ही एनडीए के तरफ से ही क्यों न हों.
दिलचस्प बात यह है कि मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालिया गुस्से को जायज बताते हुए कहा कि वो भी उनके विचारों से सहमत हैं. मांझी का यह रुख जदयू से उनकी नजदीकी और चिराग के साथ खींचतान को और स्पष्ट करता है.
बोधगया और मखदूमपुर जैसी सीटें दलित मतदाताओं के प्रभाव वाली हैं, जहां मांझी और चिराग दोनों की मजबूत पकड़ मानी जाती है. ऐसे में एक ही गठबंधन के दो दलों का आमने-सामने आना, न केवल वोट कमी की स्थिति बनाएगा बल्कि भाजपा-जदयू की चिंता भी बढ़ाएगा.
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