पटना। बिहार की चुनावी सियासत अचानक रोमांचक मोड़ पर आ गई है. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी आज अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी करने वाली है. कुछ ही दिन पहले जारी हुई पहली सूची में डॉक्टरों, शिक्षकों, पूर्व नौकरशाहों से लेकर ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों तक को जगह देकर पीके ने यह साबित कर दिया था कि वे पारंपरिक राजनीति नहीं, प्रयोगशाला मॉडल पर चुनावी लड़ाई लड़ रहे हैं.
लेकिन आज की घोषणा सिर्फ उम्मीदवारों के नाम की वजह से नहीं, बल्कि एक संभावित ऐतिहासिक मुकाबले की संभावना की वजह से सुर्खियों में है.
राघोपुर का रण सबसे दिलचस्प
वैशाली जिले की राघोपुर सीट, जिसे अक्सर आरजेडी का अभेद्य किला कहा जाता है, अब राजनीति का सबसे बड़ा युद्धक्षेत्र बनने की ओर है. प्रशांत किशोर ने हाल ही में यहां लगातार पदयात्राएं और नुक्कड़ संवाद कर यह संकेत दिया था कि—
“अमेठी में भी कभी गांधी परिवार अजेय माना जाता था, लेकिन इतिहास बदला. राघोपुर में भी जनता चाहे तो वही दोहराया जा सकता है.”
243 सीटों पर उतरेगी जन सुराज
जन सुराज पहले ही ऐलान कर चुका है कि वह बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगा. पहली सूची के बाद अब भी करीब 190 सीटें खाली हैं. सूत्रों का कहना है कि दूसरी सूची में ओबीसी, ईबीसी, अल्पसंख्यक और महिलाओं को बड़ा प्रतिनिधित्व दिया जाएगा.
लेकिन आज का सबसे बड़ा सवाल यही है —क्या प्रशांत किशोर राघोपुर से खुद मैदान में उतरने का ऐलान करेंगे? या वे विरोधियों और जनता को कुछ और दिनों तक सस्पेंस में रखेंगे?
जो भी हो, इतना निश्चित है कि बिहार की राजनीति अब सिर्फ एनडीए बनाम महागठबंधन नहीं रह गई — अब मैदान में एक तीसरा खिलाड़ी पूरी तैयारी के साथ उतर चुका है.