जयपुर ग्रामीण सीट पर 2024 लोकसभा चुनाव की गिनती को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है. वोट गिनती खत्म हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन भाजपा सांसद राव राजेंद्र सिंह और कांग्रेस उम्मीदवार अनिल चोपड़ा के बीच “जीत किसकी सही, हार किसकी गलत” का मामला अभी कोर्ट में अटका हुआ है. आज राजस्थान हाईकोर्ट में इस केस की सुनवाई हुई, जिसमें खुद राव राजेंद्र सिंह पेश हुए. जस्टिस मनीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने करीब 45 मिनट तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और चुनाव आयोग से कुछ और कागज़ मांगे. अब अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी.
सुनवाई के दौरान राव राजेंद्र सिंह अपने वकील के साथ कोर्ट में मौजूद रहे. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अनिल चौपड़ा के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया. उनका कहना था कि ईवीएम या फॉर्म 17C में गड़बड़ी जैसी बातें सिर्फ “राजनीतिक नौटंकी” हैं. वहीं कोर्ट ने कहा कि “चुनाव की पारदर्शिता सबसे अहम है,” और आयोग को सात दिनों में बूथ-वार डेटा और फॉर्म 17C जमा करने का आदेश दिया.
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अनिल चौपड़ा ने दावा किया कि मतगणना के दौरान करीब 1200 वोटों में गड़बड़ी हुई थी. वहीँ भाजपा ने इसे “विपक्ष का हताश प्रयास” कहा, जो चुनावी हार को पचा नहीं पा रहा.
कुछ जगह बिजली गुल हुई, मशीनें गड़बड़ाईं और रिजल्ट की सटीकता पर सवाल उठे. अब सबकी निगाहें 15 नवंबर की सुनवाई पर हैं — क्या कोर्ट दोबारा गिनती का आदेश देगा या मामला यहीं थम जाएगा?