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Jabalpur Cruise Tragedy: 10 मिनट का वो खौफनाक मंजर और स्टोर रूम में कैद रह गईं ‘जिंदगियां’, बरगी डैम हादसे की इनसाइड स्टोरी!

जबलपुर। मध्य प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक काला धब्बा लगा देने वाले बरगी डैम हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। 20 सालों से शांत लहरों पर तैरने वाला यह क्रूज महज 10 मिनट के भीतर जलसमाधि ले लेगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। लेकिन इस हादसे की सबसे हृदयविदारक तस्वीर तब सामने आई जब सेना के गोताखोरों ने 12 घंटे बाद एक मां और उसकी 4 साल की मासूम बेटी का शव बाहर निकाला माँ ने आखिरी सांस तक अपनी लाडली को सीने से सटाए रखा था।

हादसे की ‘टाइमलाइन’: 600 सेकंड और अफरा-तफरी

शाम के करीब 6:00 बज रहे थे जब अचानक तेज हवाओं ने लहरों को उग्र कर दिया। शुरुआती जांच और चश्मदीदों के मुताबिक:

  • गलत फैसला: जब हालात बिगड़ने लगे, तब क्रू मेंबर्स ने यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनने को कहा।
  • संतुलन बिगड़ा: लाइफ जैकेट एक ही तरफ रखे थे। उसे लेने के लिए करीब 43 यात्री एक साथ क्रूज के एक हिस्से की ओर दौड़ पड़े।
  • मौत का झुकाव: अचानक वजन एक तरफ बढ़ने से क्रूज असंतुलित होकर पलट गया।

सुरक्षा की वो चूक जो ‘कत्ल’ बन गई

सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा प्रोटोकॉल पर है। नियमानुसार यात्रियों को क्रूज पर चढ़ते ही लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य है, लेकिन बरगी डैम में ये जैकेट महज एक शो-पीस साबित हुए। जब तक खतरा भांपा गया, तब तक देर हो चुकी थी।

रेस्क्यू टीम का बयान: “जब हम गहराई में पहुंचे, तो नजारा देख आंखें भर आईं। मां ने खुद को और अपनी बच्ची को बचाने के लिए लाइफ जैकेट पहनने की कोशिश की थी, लेकिन वे क्रूज के मलबे के नीचे फंस गए। मां की बाहें अपनी बेटी के लिए आखिरी कवच बनी हुई थीं।”

9 मौतें और सिस्टम पर सवाल

हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 29 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की संयुक्त टीम ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में यह ऑपरेशन चलाया। रात भर मौके पर मौजूद रहे मंत्रियों और मुख्यमंत्री मोहन यादव की निगरानी में डूबे हुए क्रूज को बाहर निकाल लिया गया है।

सरकारी सहायता और आगे की राह:

  1. मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया गया है।
  2. एमपी पर्यटन विभाग के इस क्रूज की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

पर्यटन बनाम लापरवाही: क्या हम सुरक्षित हैं?

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम है। 20 साल पुराना ट्रैक रिकॉर्ड एक झटके में तबाह हो गया क्योंकि ‘इमरजेंसी रिस्पॉन्स’ की कोई ट्रेनिंग न तो स्टाफ के पास थी और न ही यात्रियों को जागरूक किया गया था।

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