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ईरान-अमेरिका जंग : ट्रंप की 48 घंटे की धमकी, ईरान बोला- पानी सप्लाई तक करेंगे तबाह

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग को अब 22 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान ईरान ने कई बार जवाबी हमले कर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है, लेकिन लगातार हो रहे हमलों में उसके कई बड़े नेताओं के मारे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने अब अरब देशों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ईरान के पलटवार से पूरा क्षेत्र दहशत में है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इस बीच अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा क्या?

ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलता, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को पूरी तरह तबाह कर देगा।

इस धमकी का ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया है। ईरानी सेना ने साफ कहा है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला किया गया, तो वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के एनर्जी, आईटी और खासतौर पर डीसैलिनेशन (पानी शुद्धिकरण) प्लांट्स को निशाना बनाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा होता है, तो यह जंग सीधे पानी की सप्लाई पर असर डाल सकती है, जिससे पूरे अरब क्षेत्र में गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

पानी पर हमला बना हथियार, 1983 में CIA ने दी थी चेतावनी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच पानी की सप्लाई पर खतरा कोई नया नहीं है। ब्रिटिश अखबार The Guardian की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1983 में CIA ने भी चेतावनी दी थी कि अगर डीसैलिनेशन (पानी शुद्धिकरण) प्लांट्स को निशाना बनाया गया, तो पूरे क्षेत्र में दहशत और अराजकता फैल सकती है। लोग बड़े पैमाने पर शहर छोड़ने लगेंगे और हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।

हाल ही में इस खतरे की झलक भी देखने को मिली। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने उसके क़ेश्म द्वीप पर मौजूद एक डीसैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया। हालांकि अमेरिका ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इसके अगले ही दिन बहरीन ने भी दावा किया कि उसके एक प्लांट पर हमला हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर वॉर’ में बदलता है, तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक होंगे। पानी की सप्लाई बाधित होने से कुछ ही दिनों में बड़े शहरों में गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

इसके अलावा पर्यावरणीय खतरे भी तेजी से बढ़ सकते हैं। इन प्लांट्स से जुड़े केमिकल्स अगर समुद्र में फैलते हैं, तो यह समुद्री जीवन और इंसानों दोनों के लिए घातक साबित हो सकते हैं।

हालांकि अब तक बड़े पैमाने पर इन प्लांट्स पर हमले नहीं हुए हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे ‘रणनीतिक संयम’ मानते हैं, क्योंकि पानी के संसाधनों पर हमला सीधे मानवता के खिलाफ कदम माना जाएगा और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विरोध हो सकता है।

news desk

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