इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्च स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। इस विफलता के साथ ही खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका की प्रमुख शर्तों को मानने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके चलते यह संवाद बीच में ही टूट गया।
बातचीत की नाकामी की सबसे बड़ी वजह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बनी। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस सामरिक समुद्री मार्ग को लगभग बंद कर रखा है।
सीएनएन (CNN) को दिए एक बयान में ईरानी सूत्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक साझा सहमति नहीं बनती, तब तक होर्मुज स्ट्रेट पर प्रतिबंध जारी रहेंगे। ईरान का आरोप है कि अमेरिका अपनी मांगों में अत्यधिक कठोरता बरत रहा है। सूत्र ने कड़े लहजे में कहा, “ईरान को किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं है; अगर शर्तें नहीं मानी गईं, तो समुद्री मार्ग बंद ही रहेगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ता विफल होने से वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। चूंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होने वाली ऊर्जा सप्लाई पर निर्भर है, ऐसे में आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल और सैन्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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