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ईरान-अमेरिका महा-समझौता: 150 अरब डॉलर की डील और परमाणु ब्रेक, क्या जिनेवा बनेगा शांति का नया केंद्र?

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जो वैश्विक राजनीति की दिशा बदल सकती है। दशकों की कड़वाहट के बाद, अमेरिका और ईरान एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच तीन मुख्य बिंदुओं पर सहमति बन गई है, जिसके बाद अब एक पेज का औपचारिक प्रस्ताव जारी करने की तैयारी है।

1. परमाणु हथियारों पर ‘फुल स्टॉप’

इस समझौते की सबसे बड़ी शर्त ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ईरान इस बात पर सहमत हुआ है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इसके लिए वह यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को रोक देगा। साथ ही, ईरान के पास मौजूद मौजूदा संवर्धित यूरेनियम के भंडार को या तो नष्ट किया जाएगा या उसे नागरिक उपयोग के लिए पतला (Dilute) किया जाएगा।

2. होर्मुज जलडमरूमध्य से हटेगी नाकेबंदी

वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), अब युद्ध के साये से बाहर आ सकता है। समझौते के तहत, ईरान अपनी ओर से की गई नाकेबंदी हटाएगा, जबकि अमेरिका होर्मुज के बाहरी हिस्से में तैनात अपने जहाजों और ब्लॉकेड को पीछे हटा लेगा। इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों और सप्लाई चेन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

3. आर्थिक प्रतिबंधों की समाप्ति और 150 अरब डॉलर की वापसी

ईरान के लिए सबसे बड़ी जीत उसके फ्रीज किए गए फंड की वापसी है। अमेरिका ईरान पर लगे कठोर आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने पर सहमत हो गया है। इस प्रक्रिया के जरिए ईरान को लगभग 150 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि वापस मिल सकती है, जो उसकी चरमराती अर्थव्यवस्था के लिए ‘बूस्टर डोज’ साबित होगी।

इस्लामाबाद नहीं, अब जिनेवा में होगी ‘आमने-सामने’ की जंग खत्म?

बैठक के स्थान को लेकर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन पलड़ा जिनेवा (Switzerland) का भारी नजर आ रहा है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं:

  • ट्रंप का इशारा: न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्टर डूनबोर्स ने जब राष्ट्रपति ट्रंप से इस बारे में बात की, तो ट्रंप ने चुटकी लेते हुए कहा, “समझौता लगभग फाइनल है, लेकिन तुम (रिपोर्टर) गलती से इस्लामाबाद मत चले जाना, क्योंकि अभी कुछ तय नहीं है।” ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका इस्लामाबाद के बजाय किसी अन्य न्यूट्रल वेन्यू को प्राथमिकता दे रहा है।
  • जिनेवा का इतिहास: ईरान खुद भी जिनेवा में बैठक का इच्छुक है। ऐतिहासिक रूप से जिनेवा शांति समझौतों (जैसे सोवियत-अफगान और फ्रांस-वियतनाम) का केंद्र रहा है। साथ ही, युद्ध की शुरुआत से पहले भी यहीं बैठक प्रस्तावित थी, जो अमेरिकी हमले के कारण टल गई थी।

ईरान से आधिकारिक हरी झंडी मिलते ही दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (Delegation) आमने-सामने बैठकर ‘एक पेज’ के समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

news desk

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