वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जो वैश्विक राजनीति की दिशा बदल सकती है। दशकों की कड़वाहट के बाद, अमेरिका और ईरान एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच तीन मुख्य बिंदुओं पर सहमति बन गई है, जिसके बाद अब एक पेज का औपचारिक प्रस्ताव जारी करने की तैयारी है।
इस समझौते की सबसे बड़ी शर्त ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ईरान इस बात पर सहमत हुआ है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इसके लिए वह यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को रोक देगा। साथ ही, ईरान के पास मौजूद मौजूदा संवर्धित यूरेनियम के भंडार को या तो नष्ट किया जाएगा या उसे नागरिक उपयोग के लिए पतला (Dilute) किया जाएगा।
वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), अब युद्ध के साये से बाहर आ सकता है। समझौते के तहत, ईरान अपनी ओर से की गई नाकेबंदी हटाएगा, जबकि अमेरिका होर्मुज के बाहरी हिस्से में तैनात अपने जहाजों और ब्लॉकेड को पीछे हटा लेगा। इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों और सप्लाई चेन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
ईरान के लिए सबसे बड़ी जीत उसके फ्रीज किए गए फंड की वापसी है। अमेरिका ईरान पर लगे कठोर आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने पर सहमत हो गया है। इस प्रक्रिया के जरिए ईरान को लगभग 150 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि वापस मिल सकती है, जो उसकी चरमराती अर्थव्यवस्था के लिए ‘बूस्टर डोज’ साबित होगी।
बैठक के स्थान को लेकर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन पलड़ा जिनेवा (Switzerland) का भारी नजर आ रहा है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं:
ईरान से आधिकारिक हरी झंडी मिलते ही दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (Delegation) आमने-सामने बैठकर ‘एक पेज’ के समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
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