ईरान में पिछले 12 दिनों से सुलग रहा आर्थिक असंतोष अब एक राजनीतिक विद्रोह की शक्ल ले चुका है। हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि गुरुवार (8 जनवरी) की रात तेहरान ने पूरे देश को ‘डिजिटल आइसोलेशन’ में डाल दिया। देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट के जरिए शासन ने ईरान का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह काट दिया है।
सड़कों पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण है; कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं, जिसमें सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया है और सैन्य ठिकानों के पास बमबारी व धमाकों की खबरें भी सामने आई हैं। माना जा रहा है कि सरकार ने ये कदम तभी उठाया जब क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने जनता से सामूहिक विरोध में उतरने की अपील की। जानकारों का मानना है कि इंटरनेट बंद करना और बल प्रयोग करना शासन की पुरानी ‘सर्वाइवल स्ट्रेटजी’ है, ताकि बगावत की आवाज़ को सरहदों के अंदर ही दफन किया जा सके।
सरकार की खिलाफत करने वाले लोगों के अनुसार ईरान में विद्रोह की वजह आर्थिक बर्बादी, सुविधाओं की कमी और राजनीतिक दबाव का मेल है। सालों से लगे प्रतिबंधों और इज़रायल के साथ हालिया युद्ध ने अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर दिया है, जिससे महंगाई 50% के पार पहुंच गई है। पानी-बिजली के भारी संकट और क्षेत्रीय साथियों (सीरिया, हिजबुल्लाह) के कमजोर पड़ने ने आग में घी का काम किया है। अब जनता केवल रोटी-पानी के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और तानाशाही को खत्म कर ‘सत्ता बदलने’ के लिए सड़कों पर है।
हिंसा और बढ़ता मृत्यु दर
मानवाधिकार एजेंसियों के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी में अब तक कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,260 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। तेहरान के बाजारों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, विरोध की लहर तेजी से फैल रही है।
ट्रंप और नेतन्याहू का कड़ा रुख
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की हत्या करना शुरू किया, तो वाशिंगटन उन पर ‘कड़ा प्रहार’ करेगा। वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरान की जनता के नाम एक संदेश जारी किया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ‘ईरान के बहादुर लोगों, अब समय आ गया है कि तुम अपनी आजादी के लिए खड़े हो जाओ। मैं तुम्हारे साथ हूँ, और इज़राइल के लोग तुम्हारे साथ हैं’।
सीनेटर ग्राहम की चेतावनी और पहलवी की भूमिका
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अयातुल्ला अली खामेनेई को “धार्मिक नाजी” करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि हत्याएं जारी रहीं, तो अमेरिका ‘घातक कार्रवाई’ कर सकता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि मदद आ रही है।
दूसरी ओर, क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त किया है। हालांकि, ट्रंप ने अभी पहलवी से मिलने से इनकार करते हुए कहा कि ये ईरानी जनता को तय करना चाहिए कि उनका नेतृत्व कौन करेगा।
ईरान के लिए चौतरफा संकट
वर्षों के प्रतिबंधों और जून 2025 में इजरायल के साथ हुए भीषण युद्ध ने देश की कमर तोड़ दी है। दिसंबर 2024 में सीरियाई राष्ट्रपति असद का तख्तापलट, हिजबुल्लाह का कमजोर होना और वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की अमेरिकी हिरासत ने ईरान को अलग-थलग कर दिया है और भीषण जल संकट ने स्थानीय स्तर पर लोगों के गुस्से को और अधिक भड़काया है।
खामेनेई का पलटवार
इतने भारी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव के बावजूद, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अपने रुख पर अड़े हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “हम दुश्मन के आगे नहीं झुकेंगे। हम दुश्मन को घुटनों पर ला देंगे।”
वहीं माना जा रहा है कि ईरान में जो विद्रोह हो रहा है उसके पीछे अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ है। ईरान में खामनेई की सरकार अमेरिका और इजरायल दोनों की धूर विरोधी रही है। अमेरिका और इजरायल दोनों चाहते हैं कि ईरान में उनके हिसाब की यानी पहलवी की सत्ता वापस आ जाए जैसी 1979 तक थी। असल में गजा युद्ध के दौरान जब इजरायल और ईरान में झड़प हुई थी तब ईरान ने इजरायल को काफी नुकसान पहुंचाया था। इजरायल को मालूम है कि ईरान की सत्ता बदलते ही पूरे मीडिल ईस्ट में उसे चुनौती देने वाला कोई नहीं बचेगा।