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Iran Nuclear Weapon: NPT से हटने की धमकी के पीछे क्या है ईरान का गेम प्लान? रूस-चीन ने दी बड़ी ताकत

मध्य पूर्व (Middle East) की भू-राजनीति इस समय इतिहास के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। दशकों से परमाणु शक्ति बनने का सपना देख रहा ईरान अब ‘फिनिश लाइन’ के बिल्कुल करीब खड़ा है। तेहरान ने अमेरिका और इजराइल के दबाव को ध्वस्त करने के लिए अपना सबसे बड़ा कूटनीतिक दांव चल दिया है— परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने की धमकी।

विशेषज्ञों का मानना है कि NPT छोड़ने की यह चेतावनी सिर्फ एक धमकी नहीं, बल्कि ईरान द्वारा आधिकारिक रूप से परमाणु परीक्षण (Nuclear Testing) करने के लिए तैयार किया गया एक कानूनी और सुरक्षित रास्ता है।

‘महाविनाश’ की दहलीज पर ईरान: सिर्फ कुछ हफ़्तों का ‘ब्रेकआउट टाइम’

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की हालिया खुफिया रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर यरूशलम (इजराइल) तक हड़कंप मचा दिया है। इस रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े कुछ इस तरह हैं:

  • संवर्धित यूरेनियम का विशाल भंडार: नतांज और फोर्दो पर हुए हमलों के बावजूद, ईरान के पास इस समय 60% तक संवर्धित लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है।
  • 10 से 12 परमाणु बम की क्षमता: यदि ईरान इस भंडार को 90% (हथियार ग्रेड) तक रिफाइन कर लेता है, तो वह पलक झपकते ही 10 से 12 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है।
  • कुछ हफ्तों की दूरी: ईरान का ‘ब्रेकआउट टाइम’ (यूरेनियम को बम के स्तर तक लाने का समय) अब महीनों से घटकर महज कुछ हफ्तों का रह गया है।

मुज्तबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रिजाई की खुली धमकी: “अगर अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी या होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में ईरान के खिलाफ कोई भी हिमाकत की, तो ईरान NPT से बाहर हो जाएगा।”

ड्रैगन और रशियन बीयर का ‘रक्षक कवच’: बदल गया जंग का समीकरण

इतने कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद भी ईरान अगर परमाणु बम बनाने के मुहाने पर खड़ा है, तो इसके पीछे रूस और चीन का एक अघोषित त्रिकोण (Axis) काम कर रहा है।

1. रूस की ‘रोसाटॉम’ का वैज्ञानिक सपोर्ट

ईरान के बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट में रूस की सरकारी परमाणु कंपनी ‘रोसाटॉम’ के टॉप वैज्ञानिक और इंजीनियर लंबे समय से डटे हुए हैं। यह तकनीकी मदद ही ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की रीढ़ बनी हुई है।

2. चीन का ‘सैटेलाइट और मिसाइल’ अपग्रेड

जंग के बीच चीन ने ईरान को अपनी एडवांस सैटेलाइट तकनीक बेची है। इसके जरिए ईरान ने अपने ‘मिसाइल गाइडेंस सिस्टम’ को इतना सटीक और खतरनाक बना लिया है कि अब उसे अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए भेद पाना नामुमकिन सा हो गया है।

स्टक्सनेट (Stuxnet) से लेकर आज तक: जब फेल हो गए इजराइल के ‘डिजिटल हथियार’

साल 2010 में इजराइल की टॉप सीक्रेट साइबर वॉरफेयर यूनिट 8200 ने इतिहास का पहला डिजिटल हथियार ‘स्टक्सनेट वायरस’ बनाकर नतांज संयंत्र के सेंट्रीफ्यूज को तबाह कर दिया था, जिससे ईरान का परमाणु सपना 15 साल पीछे चला गया।

लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब न तो प्रतिबंध काम आ रहे हैं और न ही बमबारी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मान चुके हैं कि ईरान के साथ अब कोई जल्दबाजी में समझौता नहीं किया जा सकता।

ज्ञान को तबाह नहीं कर सकता अमेरिका

ईरान के परमाणु संयंत्रों को मलबे में तो बदला जा सकता है, लेकिन उसके वैज्ञानिकों के दिमाग में मौजूद ‘परमाणु ज्ञान’ (Nuclear Knowledge) को मिटाना अब अमेरिका और इजराइल के बस की बात नहीं है। ईरान दुनिया को यह संदेश दे चुका है कि वह उस मोड़ पर है जहां से परमाणु महाशक्ति बनना केवल उसकी इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है।

news desk

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