बांग्लादेश की सियासत में यह अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ है। अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के हिंसक होने के बाद देश छोड़ने को मजबूर हुईं शेख हसीना तब से भारत में रह रही हैं। कुछ ही समय पहले बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने 2024 के प्रदर्शनों में हुई मौतों के लिए उन्हें सीधे तौर पर दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी।
आमतौर पर ऐसे मामलों में राजनेता अंतरराष्ट्रीय शरण या कानूनी सुरक्षा ढूंढते हैं, लेकिन शेख हसीना ने सीधे मौत के कुएं में कूदने का मन बना लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह फैसला बांग्लादेश में उनकी पार्टी अवामी लीग के उन बिखरे और प्रताड़ित कार्यकर्ताओं में जान फूंकने की आखिरी कोशिश है जो इस समय भारी दमन झेल रहे हैं।
बांग्लादेश की अदालत ने सिर्फ शेख हसीना ही नहीं, बल्कि उनके पूरे कोर ग्रुप पर हंटर चलाया है। इसी मामले में अदालत ने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मौत की सजा सुनाई है, जबकि पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पांच साल की जेल की सजा मिली है। इसके साथ ही कोर्ट ने शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री की देश में मौजूद तमाम संपत्तियां जब्त करने के भी आदेश दिए हैं। ऐसे में जब सब कुछ दांव पर लग चुका है, तब हसीना का यह आत्मघाती कदम ढाका की राजनीति में नया तूफान लाने वाला है।
| नेता का नाम | पद (पूर्व) | अदालत का फैसला / कार्रवाई |
| शेख हसीना | प्रधानमंत्री | मौत की सजा (फांसी) और संपत्ति जब्त करने का आदेश |
| असदुज्जमान खान कमाल | गृह मंत्री | मौत की सजा (फांसी) और संपत्ति जब्ती |
| चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून |
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