Iran-US Nuclear Deal: अमेरिका और ईरान के बीच सालों से जारी परमाणु विवाद में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है। न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अपने सबसे खतरनाक हथियार यानी ‘हाईली एनरिच्ड यूरेनियम’ (Highly Enriched Uranium) का भंडार छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ईरान का बड़ा सरेंडर माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला? ईरान ने क्यों टेके घुटने?
लंबे समय से अमेरिका और इजराइल की सैन्य धमकियों का सामना कर रहे ईरान ने आखिरकार बैकफुट पर आने का फैसला किया है। प्रस्तावित समझौते के तहत, ईरान अपने 440 किलो (करीब 970 पाउंड) संवर्धित यूरेनियम का भंडार सौंपने के लिए राजी हो गया है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस समझौते के लिए तैयार है। हालांकि, यूरेनियम को किस प्रक्रिया के तहत सौंपा जाएगा, इसका तकनीकी खाका औपचारिक हस्ताक्षर होने के बाद ही तय किया जाएगा। इस ऐतिहासिक कदम से न सिर्फ दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा टल सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सामान्य आवाजाही भी बहाल हो सकेगी।
वॉशिंगटन की कड़ी चेतावनी के आगे झुका तेहरान
शुरुआत में ईरान यूरेनियम के मुद्दे पर बात करने से बच रहा था और इसे बाद की चर्चाओं के लिए टालना चाहता था। लेकिन बाइडेन-ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख ने ईरान की रणनीति बदल दी।
- सैन्य कार्रवाई की धमकी: अमेरिकी वार्ताकारों ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि ईरान ने यूरेनियम पर शुरुआती प्रतिबद्धता नहीं दिखाई, तो अमेरिका बातचीत छोड़कर दोबारा सैन्य हमला शुरू कर देगा।
- बंकर बस्टर हमले की थी तैयारी: रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के इस्फहान स्थित भूमिगत परमाणु केंद्र को तबाह करने के लिए ‘बंकर बस्टर’ हमले और अमेरिका-इजराइल संयुक्त कमांडो ऑपरेशन की पूरी रूपरेखा (Blue Print) तैयार कर ली थी।
कितना खतरनाक है ईरान का यूरेनियम भंडार?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के आंकड़ों के अनुसार:
- ईरान के पास वर्तमान में 60 प्रतिशत तक संवर्धित (Enriched) लगभग 970 पाउंड यूरेनियम है।
- इजराइल और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि अगर इस यूरेनियम को थोड़ा और रिफाइन किया जाए, तो ईरान बेहद कम समय में कई परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) बना सकता है।
रूस को सौंपा जा सकता है भंडार: सूत्रों के मुताबिक, एक प्रस्ताव यह भी है कि ईरान अपना यह यूरेनियम भंडार रूस को सौंप दे। ठीक ऐसा ही मॉडल साल 2015 में बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान हुए परमाणु समझौते (JCPOA) में अपनाया गया था।
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा: समझौता लगभग तय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि संघर्ष को समाप्त करने के लिए समझौता लगभग अंतिम चरण में है। ट्रंप ने इसे ‘शांति से जुड़ा समझौता ज्ञापन’ बताया है और कहा कि अब केवल तकनीकी पहलुओं और अंतिम शर्तों पर मुहर लगना बाकी है।
इस प्रस्तावित समझौते के मुख्य बिंदु:
- दोनों देशों के बीच युद्ध की औपचारिक समाप्ति की घोषणा।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह दोबारा खोलना।
- अगले 30 से 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नए सिरे से वार्ता शुरू करना।
- बदले में ईरान ने अपने ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फ्रीज (जमा) पड़ी अपनी संपत्तियों तक पहुंच की मांग की है।
28 फरवरी से चरम पर था तनाव
गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया था। हालांकि, अप्रैल से सीजफायर (युद्धविराम) लागू है, लेकिन स्थिति नाजुक बनी हुई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) और कच्चे तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा था। ऐसे में इस समझौते को दुनिया भर के ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।