NASA ने बुधवार को अंतरिक्ष में तेजी से गुजर रहे इंटरस्टेलर धूमकेतु 31/ATLAS की क्लोज़-अप तस्वीरें जारी की हैं. यह अब तक सिर्फ तीसरा ऐसा पुष्ट ऑब्जेक्ट है जो किसी दूसरे तारे से निकलकर हमारे सौर मंडल में दाखिल हुआ है. पिछले महीने यह मंगल ग्रह के पास से सुरक्षित दूरी बनाकर निकल गया.
गर्मी के मौसम में खोजे गए इस धूमकेतु को मंगल के पास मौजूद तीन NASA अंतरिक्ष यानों और ESA (यूरोपीय स्पेस एजेंसी) के दो उपग्रहों ने करीब 2.9 करोड़ किलोमीटर की दूरी से कैप्चर किया. तस्वीरों में यह एक धुंधला सफेद गोला जैसा दिखाई देता है.

NASA के अन्य स्पेसक्राफ्ट और जेम्स वेब टेलीस्कोप भी आने वाले हफ्तों में इसे ट्रैक करते रहेंगे. पृथ्वी से इसकी मौजूदा दूरी लगभग 307 मिलियन किलोमीटर है, और दूरबीन या बाइनाकुलर की मदद से यह सुबह होने से पहले देखा जा सकता है.
धूमकेतु दिसंबर के मध्य में धरती से 269 मिलियन किलोमीटर की सबसे नज़दीकी दूरी पर होगा, और फिर हमेशा के लिए वापस इंटरस्टेलर स्पेस में चला जाएगा.
यह धूमकेतु चिली के ATLAS टेलीस्कोप द्वारा खोजा गया था. अनुमानों के अनुसार इसका आकार 440 मीटर से लेकर 5.6 किलोमीटर तक हो सकता है. NASA वैज्ञानिक Tom Statler के मुताबिक, यह धूमकेतु शायद उस तारा प्रणाली से आया है जो हमारे सौर मंडल से भी बहुत पुरानी है. उन्होंने कहा— “इसका मतलब है कि 31/ATLAS सिर्फ दूसरी दुनिया की झलक नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों साल पुराने ब्रह्मांड की खिड़की है. यह तो पृथ्वी और सूर्य बनने से भी पहले की कहानी बता सकता है.”
NASA ने खारिज की ‘एलियन जहाज़’ वाली अफवाहें
NASA ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर फैल रही “एलियन mothership” जैसी अफवाहों में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है. NASA अधिकारी अमित क्षत्रिय ने साफ कहा—“31/ATLAS सिर्फ एक धूमकेतु है… एलियन जहाज़ नहीं.”
हार्वर्ड वैज्ञानिक Avi Loeb ने उठाए नए सवाल
NASA के वैज्ञानिक बयान के समानांतर, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक Avi Loeb ने इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट 3I/ATLAS (31/ATLAS का वैज्ञानिक नाम) के व्यवहार पर एक बार फिर चौंकाने वाली और विवादित थ्योरी रखी है. Loeb ने मीडियम पर एक लेख लिखकर कुछ नए सवाल उठाए.
Loeb के अनुसार अगर हम मान भी लें कि यह कोई प्राकृतिक पिंड है तो भी इसके Jupiter के पास पहुँचने में दिखाई देने वाली असाधारण सटीकता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. जो इस बात की संभावना को दिखता है की यह नेचुरल न होकर किसी उन्नत सभ्यता द्वारा भेजा गया “मदरशिप” हो.
Jupiter के Hill Radius पर ‘एकदम सटीक’ पहुँच
वैज्ञानिक रूप से, अगर किसी तकनीकी जहाज़ को Jupiter पर अपने उपकरण छोड़ने हों, तो उसे Jupiter के Hill Radius में प्रवेश करना पड़ता है — यानी वह इलाका जहाँ Jupiter की गुरुत्वाकर्षण शक्ति सूर्य की तुलना में ज्यादा प्रभावी हो जाती है.
16 मार्च 2026 को Jupiter का Hill Radius होगा: 53.502 मिलियन किलोमीटर
NASA के JPL Horizon डेटा के मुताबिक 3I/ATLAS का Jupiter के पास पहुँचने का अनुमान:
53.445 (+/- 0.06) मिलियन किलोमीटर
यानी दोनों मान लगभग एक समान. Loeb का दावा है कि यह एक “हज़ार में एक” जैसी दुर्लभ समानता है, जो किसी संयोग से अधिक तकनीकी नियंत्रण की ओर इशारा करती है.
जुपीटर की दिशा में जानबूझकर किया गया ‘कोर्स करेक्शन’ था?
3I/ATLAS की ट्रेजेक्टरी में जो हल्की नॉन ग्रेविटेशनल फ़ोर्स देखी गई, वह इतनी ही थी कि इसकी दिशा बिल्कुल जुपीटर के Hill Radius पर जाकर मिले. Loeb का कहना है कि यह ऐसे लगता है जैसे किसी ने जेट थ्रस्टर्स से इसकी दिशा हल्की-सी ठीक की हो.
तस्वीरों में धूमकेतु से निकलती कई ‘jets’ भी दिखाई दी थीं, जिन्हें Loeb थ्रस्टर्स होने की संभावना बताते हैं.
क्या जुपीटर पर ‘डिवाइस’ छोड़ना चाहते हैं एलियन ?
अगर यह वस्तु तकनीकी हो और Jupiter में उपकरण छोड़ना चाहती हो, तो उसे Hill Radius पर पहुंचकर उन्हें अलग करना होगा. इन उपकरणों को Jupiter की gravity में टिकने के लिए अपनी गति काफी घटानी पड़ेगी, क्योंकि 3I/ATLAS Jupiter के पास लगभग 66 km/s की रफ्तार से गुजरेगा.
Loeb का कहना है कि 16 मार्च 2026 के बाद अगर Jupiter के आसपास कोई “अनजान satellite” मिलता है, जिसे मानव जाति ने नहीं भेजा, तो यह बहुत बड़ा संकेत होगा.
Loeb मज़ाक में कहते हैं— “अगर एलियन Jupiter में रुचि लें और पृथ्वी में नहीं, तो यह वैसा ही होगा जैसे आप किसी पार्टी में हों और कोई आपके साथ नाचने में दिलचस्पी न रखे.”
Avi Loeb कौन हैं?
Avi Loeb Harvard University के Black Hole Initiative के फाउंडिंग डायरेक्टर, Galileo Project के प्रमुख और एक्स्ट्रातेरेस्ट्रिअल जैसी बेस्टसेलर किताब के लेखक हैं. सबसे पहले इन्होने ही 3I Atlas के एलियन ऑब्जेक्ट की थ्योरी दिया था. इसके पहले एक अन्य इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट “औमुअमुअओ” को भी इन्होने एलियन स्पसशिप बताया था जो आज भी रहस्य है.