अगर आपको भी लगता है कि तगड़ा मुनाफा सिर्फ इंडियन स्टॉक मार्केट में ही बन सकता है, तो भाई, आपका यह सोचना अब ‘आउटडेटेड’ हो चुका है। पिछले एक साल में ग्लोबल मार्केट्स ने रिटर्न के मामले में जो गदर मचाया है, उसने सबको चौंका दिया है। भारतीय निवेशकों के लिए अवेलेबल इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स ने इस दौरान ऐसा छप्परफाड़ रिटर्न दिया है कि मार्केट के बड़े-बड़े पंडित हैरान हैं। कुछ चुनिंदा विदेशी फंड्स ने तो महज 12 महीनों के अंदर निवेशकों का पैसा लगभग डबल करने की रफ्तार पकड़ ली है।
मिला 83% से ज्यादा का बंपर रिटर्न
लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक इंटरनेशनल फंड्स की रेस में सबसे तगड़ा परफॉर्मर ‘एडलवाइस इमर्जिंग मार्केट्स अपॉर्चुनिटीज इक्विटी ऑफशोर फंड’ (Edelweiss Emerging Markets Opportunities Equity Offshore Fund) साबित हुआ है। इस अकेले फंड ने पिछले एक साल में अपने इनवेस्टर्स को 83.18 परसेंट का माइंड-ब्लोइंग रिटर्न थमाया है। सिर्फ यही नहीं, कई दूसरी इंटरनेशनल स्कीम्स ने भी बिना किसी झंझट के 50% से ज्यादा का नेट प्रॉफिट निकाल कर दिया है।
यूएस टेक, ताइवान और चीन के बाजारों में आई बहार
ग्लोबल मार्केट के इस जबरदस्त ‘बुल रन’ के पीछे अमेरिका, जापान, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के मार्केट का हाथ है। अगर इस पूरे ट्रेंड को डिकोड करें, तो तीन बड़ी बातें साफ समझ आती हैं:
टेक शेयर्स का दबदबा: अमेरिकी शेयर बाजार का सबसे पॉपुलर टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक “Nasdaq” करीब 39% तक उछल गया। यही वजह है कि यूएस टेक ओरिएंटेड फंड्स में पैसा लगाने वालों की किस्मत चमक गई।
ताइवान की ऐतिहासिक छलांग: सेमीकंडक्टर और टेक के दम पर ताइवान का मार्केट इंडेक्स पिछले एक साल में दोगुने से भी ज्यादा हो चुका है।
इमर्जिंग मार्केट्स का कमबैक: इस बार सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि चीन और दूसरे उभरते बाजारों पर फोकस करने वाले फंड्स ने भी धमाकेदार वापसी की है। कई मामलों में तो इन्होंने अमेरिकी फंड्स को भी पीछे छोड़ दिया है।
घरेलू बनाम ग्लोबल मार्केट
पिछले एक साल का ग्राफ देखें तो भारतीय और ग्लोबल मार्केट के बीच एक क्लियर अंतर नजर आता है। जहां एक तरफ भारतीय बाजार के बड़े इंडेक्स इस दौरान थोड़े सुस्त या फ्लैट मोड में रहे, वहीं दूसरी तरफ विदेशी बाजारों ने डबल डिजिट में तूफानी ग्रोथ दर्ज की। यही वजह है कि अब समझदार और स्मार्ट भारतीय निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सेफ रखने के लिए ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन का रास्ता चुन रहे हैं।
लंपसम पर ब्रेक, लेकिन SIP का रास्ता पूरी तरह खुला
अब अगर आप भी इस बहती गंगा में हाथ धोना चाहते हैं, तो गेम का एक जरूरी नियम नोट कर लीजिए। ताबड़तोड़ रिटर्न देने वाले इन टॉप-परफॉर्मिंग इंटरनेशनल फंड्स में से कई ने बड़ी “लंपसम इन्वेस्टमेंट” लगाने पर फिलहाल ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा रखा है। यानी, आप इनमें एक साथ बड़ा फंड ट्रांसफर नहीं कर सकते।
लेकिन पैनिक करने की कोई बात नहीं है, क्योंकि निवेशकों के लिए SIP का रास्ता बिल्कुल साफ है। आप हर महीने एक छोटी, फिक्स्ड रकम इनवेस्ट करके भी इन इंटरनेशनल मार्केट्स की ग्रोथ का पूरा फायदा उठा सकते हैं। वैसे कुछ फंड्स लंपसम और एसआईपी दोनों एक्सेप्ट कर रहे हैं, पर मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए एसआईपी के जरिए धीरे-धीरे कदम बढ़ाना ही इस समय सबसे कूल और समझदारी भरा मूव है।