दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में शुक्रवार की सुबह कुछ अलग थी. फूलों से सजे एक छोटे से मंच पर सादगी के बीच जब राहुल गांधी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए, तो लगा जैसे कांग्रेस अपने इतिहास के एक भूले हुए अध्याय को फिर से पलट रही हो.
दरअसल शुक्रवार यानी 24 अक्तूबर के कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सीताराम केसरी की पुण्यतिथि थी. और शायद इतने सालों में ये पहला मौका था जब कांग्रेस मुख्यालय में शीर्ष नेतृत्व द्वारा संगठित तरीके से सीताराम केसरी की पुण्यतिथि मनाई गई है. लेकिन इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है जो हम बताएंगे लेकिन पहले पढ़िए कि आखिर कौन थे सीताराम केसरी?
कांग्रेस के सबसे कठिन दिनों में केसरी ने संभाली थी पार्टी की बागडोर!

यह वही जगह है, जहां कभी केसरी ने पार्टी की बागडोर संभाली थी. वो दौर जब कांग्रेस अपने सबसे कठिन समय से गुजर रही थी. कुछ वर्षों के अंतराल में हुई इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या के बाद राजनीतिक अस्थिरता और गिरते जनाधार के बीच, सीताराम केसरी ने न केवल संगठन को एकजुट रखने का प्रयास किया, बल्कि कांग्रेस का नेतृत्व भी संभाला.
पटना जिले के दानापुर में 15 नवंबर 1919 को जन्मे केसरी का जीवन पूरी तरह कांग्रेस को समर्पित रहा. कांग्रेस में सेवादल के बैंड से अपनी राजनीति शुरू करने वाले केसरी 1996 से 1998 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे. ये एक ऐसा दौर था जब गांधी परिवार कांग्रेस की सक्रिय राजनीति से दूर था. राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी पार्टी और राजनीति से दूर थीं. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी छोटे थे. तब नरसिम्हा राव की सरकार थी और पार्टी को सीताराम केसरी संभाल रहे थे.
इस साल बदली कहानी
मगर इस साल कहानी कुछ बदली. देवघर में रहने वाले उनके भतीजे राकेश केसरी, ने कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपने चाचा की 25वीं पुण्यतिथि पार्टी मुख्यालय में मनाने की इच्छा जताई. जिसके बाद उन्हे पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने फोन कर बताया कि कांग्रेस न केवल पुण्यतिथि का कार्यक्रम करना चाहती थी, बल्कि पूरा आयोजन भी खुद ही करेगी.
शुक्रवार को राहुल गांधी जब केसरी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे, तो उन्होंने राकेश केसरी और उनके परिवार मुलाकात कर बातचीत की और उन्हे हर संभव मदद का भरोसा भी दिलाया.