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भारतीय नौसेना को मिलेगी नई समुद्री ताकत! इस हफ्ते बेड़े में शामिल होगी स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’, दुश्मनों पर रखेगी पैनी नजर

विशाखापत्तनम: भारतीय नौसेना इस सप्ताह अपनी युद्ध क्षमता को और मजबूत करने जा रही है। नौसेना के बेड़े में स्वदेशी प्रोजेक्ट-17ए की छठी अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि (एफ-38)’ शामिल की जाएगी। इस युद्धपोत का कमीशनिंग समारोह विशाखापत्तनम में होगा। इसे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और आधुनिक नौसैनिक शक्ति की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

महेंद्रगिरि का डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। नौसेना का कहना है कि यह युद्धपोत स्वदेशी तकनीक से अत्याधुनिक युद्धपोत निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमता का मजबूत उदाहरण है।

स्टील्थ तकनीक से लैस, दुश्मन की नजर से रहेगा दूर

महेंद्रगिरि को आधुनिक स्टील्थ तकनीक के साथ तैयार किया गया है, जिससे इसकी रडार पहचान काफी कम हो जाती है। इसके अलावा इसमें बेहतर सुरक्षा, उच्च स्तर की स्वचालन प्रणाली और कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी संचालन की क्षमता दी गई है। यही वजह है कि यह आधुनिक समुद्री युद्ध की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया युद्धपोत माना जा रहा है।

तेज रफ्तार और लंबी दूरी तक अभियान चलाने में सक्षम

इस फ्रिगेट में आधुनिक कंबाइंड डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली लगाई गई है, जिससे यह तेज गति से लंबी दूरी तक समुद्री अभियान चला सकता है। समुद्र में लंबे समय तक तैनाती और अलग-अलग परिस्थितियों में संचालन के लिए इसे विशेष रूप से विकसित किया गया है।

मिसाइलों से लेकर पनडुब्बी रोधी प्रणाली तक, कई आधुनिक हथियारों से लैस

महेंद्रगिरि में अत्याधुनिक हथियार और आधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। इसमें सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, पनडुब्बी रोधी प्रणाली और एकीकृत युद्ध प्रबंधन प्रणाली जैसी कई उन्नत सैन्य क्षमताएं मौजूद हैं। नौसेना के अनुसार यह युद्धपोत हवा, समुद्र और पनडुब्बियों से आने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम है।

युद्ध के साथ राहत और बचाव अभियानों में भी निभाएगा अहम भूमिका

यह फ्रिगेट केवल युद्ध अभियानों तक सीमित नहीं रहेगा। समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक तैनाती, मानवीय सहायता, आपदा राहत, खोज एवं बचाव अभियान और लंबे समय तक समुद्र में परिचालन जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में भी इसकी भूमिका रहेगी।

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से हुआ निर्माण

महेंद्रगिरि के निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इस परियोजना में देश की बड़ी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने भी योगदान दिया है। इससे घरेलू रक्षा विनिर्माण को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

प्रोजेक्ट-17ए की बड़ी उपलब्धि बनेगी महेंद्रगिरि

नौसेना का मानना है कि महेंद्रगिरि का बेड़े में शामिल होना प्रोजेक्ट-17ए कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। आने वाले समय में इसी श्रेणी के अन्य युद्धपोत भी नौसेना का हिस्सा बनेंगे, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा और युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। साथ ही वैश्विक स्तर पर स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में भारत की पहचान और मजबूत होगी।

महेंद्रगिरि नाम का भी है खास महत्व

इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वतमाला के नाम पर रखा गया है, जिसे शक्ति, दृढ़ता और अटूट संकल्प का प्रतीक माना जाता है। भारतीय नौसेना के इतिहास में पहली बार किसी युद्धपोत को ‘महेंद्रगिरि’ नाम दिया गया है।

vineet verma

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