अमेरिका इंडिया ट्रेड डील
अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ और अन्य व्यापारिक मतभेदों के कारण लंबे समय से अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है। दरअसल, कई महीनों की अनिश्चितता और बढ़ते व्यापारिक दबाव के बाद भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौता आखिरकार तय हो गया था, लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है, उसने सभी को हैरान कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने एक बार फिर बड़ा खेल किया है और भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी फैक्टशीट में चुपचाप बदलाव कर दिए हैं। व्हाइट हाउस की ओर से यह दस्तावेज जारी होने के एक दिन बाद ही इसके शब्दों और कुछ शर्तों में परिवर्तन कर दिया गया। अब सवाल यह है कि इसमें क्या बदलाव किए गए हैं और इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता है।
फैक्टशीट में पहले क्या कहा गया था
भारत और अमेरिका के बीच आपसी लाभ पर आधारित ट्रेड डील के ढांचे के सामने आने के कुछ दिनों बाद व्हाइट हाउस ने मंगलवार को एक फैक्टशीट जारी की थी। इसमें दावा किया गया था कि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई तरह के अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त करेगा या उसमें कटौती करेगा।
फैक्टशीट के शुरुआती संस्करण में यह भी कहा गया था कि भारत ने अमेरिकी सामानों की खरीद बढ़ाने का कमिटमेंट किया है और वह 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, सूचना व संचार तकनीक, कृषि, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदेगा।
अब क्या बदलाव किए गए हैं
व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर जारी फैक्टशीट के संशोधित संस्करण में कई अहम शब्दों और शर्तों को बदला गया है। नए वर्जन में “कमिटमेंट” की जगह “इरादा” शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिससे भारत पर बाध्यकारी जिम्मेदारी का संकेत कमजोर पड़ता है।
इसके अलावा, उत्पादों की सूची से “कृषि” शब्द को भी हटा दिया गया है। पहले यह कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों के साथ-साथ कई अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर टैक्स खत्म या कम करेगा, जिनमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड ज्वार, ड्राई फ्रूट, ताजे और प्रोसेस्ड फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल थे। संशोधित फैक्टशीट में “कुछ दालें” का उल्लेख पूरी तरह हटा दिया गया है।
डिजिटल टैक्स पर भी बदली भाषा
फैक्टशीट में डिजिटल टैक्स को लेकर भी अमेरिका ने अपने रुख में बदलाव किया है। पहले के संस्करण में कहा गया था कि भारत डिजिटल सर्विस टैक्स हटाएगा और डिजिटल ट्रेड से जुड़ी बाधाओं को खत्म करने के लिए मजबूत नियमों पर बातचीत करने का कमिटमेंट करेगा।
हालांकि, नए वर्जन में डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने का कोई जिक्र नहीं है। अब इसमें सिर्फ इतना कहा गया है कि भारत मजबूत द्विपक्षीय डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत के लिए तैयार है।
दोनों देशों के बीच क्या तय हुआ
पिछले हफ्ते भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम ट्रेड डील के ढांचे की घोषणा की थी। इसके तहत दोनों देश कई उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती करेंगे, ताकि आपसी व्यापार को बढ़ावा मिल सके।
प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाला आयात शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करेगा। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई अमेरिकी खाद्य व कृषि वस्तुओं पर टैक्स समाप्त या काफी कम करेगा। इनमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु चारे के लिए रेड ज्वार, ड्राई फ्रूट, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं।
500 अरब डॉलर की खरीद का रोडमैप
दोनों देशों के संयुक्त बयान के अनुसार, भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीक से जुड़े उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने की योजना बना रहा है।
ट्रंप का बड़ा फैसला
डील फाइनल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाया गया 25 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क हटाने का ऐलान किया। यह शुल्क अगस्त में इसलिए लगाया गया था क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था।
ट्रंप ने कहा कि भारत ने इस दिशा में “काफी बड़े कदम” उठाए हैं और नई दिल्ली ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल आयात कम करने का भरोसा दिया है।
कब साइन होगी फाइनल डील
नई दिल्ली और वॉशिंगटन मार्च के मध्य तक भारत-अमेरिका की फाइनल ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में हैं।
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